
अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी बैठक के दौरान...
नई दिल्ली:
राजधानी में आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने को-ऑपरेटिव फेडरलिज़म बैठक में छह राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। यहां एक बार फिर केजरीवाल ने केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि केंद्र का हस्तक्षेप सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल कामकाज में दखल देते हैं और यह बात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें खुद बताई कि उनके यहां राज्यपाल का किस तरह का दखल है।
राज्यों को ज़्यादा ताकत देने की जरूरत : केजरीवाल
उन्होंने आगे कहा, केंद्र राज्यों को कमज़ोर करके कभी मज़बूत नहीं हो सकता। राज्यों को ज़्यादा से ज्यादा ताकत देने की जरूरत है। यहां केजरीवाल ने कहा कि केंद्र राज्यपाल और एलजी के ज़रिए राजनीति करती है। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कम से कम अब तक मेरे 30 आदेश अमान्य और शून्य कर दिए। ये न सिर्फ दिल्ली सरकार के काम में दखल है, बल्कि जुडिशरी के काम भी दखल है। उन्होंने सीबीआई के भी स्वतंत्र होने की वकालत की।
ममता ने साधा स्वच्छता अभियान पर निशाना
बैठक में शामिल हुईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाषण के दौरान स्वच्छता अभियान को निशाने पर लेते हुए कहा कि एक दिन के लिए झाड़ू लगा देने से क्या सब साफ़ हो जाएगा। ये सब पब्लिसिटी के लिए तो ठीक है, लेकिन अगर असल में साफ़ करना है तो रोज़ करना पड़ता है। यहां ममता ने आरोप लगाया कि राज्यपाल निवास के ज़रिए समानांतर सरकार चलाई जा रही है।
6 राज्यों ने दिया अपना समर्थन...
बिहार सीएम नीतीश कुमार ने केजरीवाल को अपनी चुनावी व्यस्तता के चलते चिट्ठी भेजी और मिजोरम, पुदुच्चेरी के सीएम ने भी चिट्ठी भेजकर अपना समर्थन ज़ाहिर किया। कुल मिलाकर इस बैठक में 6 राज्यों ने अपना समर्थन दिया, जोकि सभी 6 अलग-अलग पार्टियों से हैं।
तीसरे मोर्चे के पुनर्गठन की एक शुरुआत...
कहने को तो इस कार्यक्रम में 6 राज्य ही हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इसमें एक दूर की कोड़ी देखी जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसको एक गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी तीसरे मोर्चे के पुनर्गठन की एक शुरुआत की तरह भी देखा जा रहा है। इसमें क्षेत्रीय पार्टियां एक साथ आ रही हैं जैसे बिहार की जनता दाल (यूनाइटेड) और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस दिल्ली की पार्टी आप के साथ आ रही हैं।
टीएमसी और लेफ्ट भी दिख रहे साथ साथ...
ख़ास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और लेफ़्ट का 36 का आंकड़ा है, लेकिन इस कार्यक्रम के बहाने दोनों एक मुद्दे साथ दिख रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह बिहार में महागठबंधन तोड़ा, उसके बाद सियासी हलकों में यह चर्चा चलने लगी है कि क्या केजरीवाल के नेतृत्व में अब तीसरे मोर्चे का पुनर्गठन होना शुरू हो रहा है? हालांकि यह कहना अभी बहुत जल्दबाज़ी होगा।
राज्यों को ज़्यादा ताकत देने की जरूरत : केजरीवाल
उन्होंने आगे कहा, केंद्र राज्यों को कमज़ोर करके कभी मज़बूत नहीं हो सकता। राज्यों को ज़्यादा से ज्यादा ताकत देने की जरूरत है। यहां केजरीवाल ने कहा कि केंद्र राज्यपाल और एलजी के ज़रिए राजनीति करती है। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कम से कम अब तक मेरे 30 आदेश अमान्य और शून्य कर दिए। ये न सिर्फ दिल्ली सरकार के काम में दखल है, बल्कि जुडिशरी के काम भी दखल है। उन्होंने सीबीआई के भी स्वतंत्र होने की वकालत की।
ममता ने साधा स्वच्छता अभियान पर निशाना
बैठक में शामिल हुईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाषण के दौरान स्वच्छता अभियान को निशाने पर लेते हुए कहा कि एक दिन के लिए झाड़ू लगा देने से क्या सब साफ़ हो जाएगा। ये सब पब्लिसिटी के लिए तो ठीक है, लेकिन अगर असल में साफ़ करना है तो रोज़ करना पड़ता है। यहां ममता ने आरोप लगाया कि राज्यपाल निवास के ज़रिए समानांतर सरकार चलाई जा रही है।
6 राज्यों ने दिया अपना समर्थन...
बिहार सीएम नीतीश कुमार ने केजरीवाल को अपनी चुनावी व्यस्तता के चलते चिट्ठी भेजी और मिजोरम, पुदुच्चेरी के सीएम ने भी चिट्ठी भेजकर अपना समर्थन ज़ाहिर किया। कुल मिलाकर इस बैठक में 6 राज्यों ने अपना समर्थन दिया, जोकि सभी 6 अलग-अलग पार्टियों से हैं।
तीसरे मोर्चे के पुनर्गठन की एक शुरुआत...
कहने को तो इस कार्यक्रम में 6 राज्य ही हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन इसमें एक दूर की कोड़ी देखी जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसको एक गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी तीसरे मोर्चे के पुनर्गठन की एक शुरुआत की तरह भी देखा जा रहा है। इसमें क्षेत्रीय पार्टियां एक साथ आ रही हैं जैसे बिहार की जनता दाल (यूनाइटेड) और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस दिल्ली की पार्टी आप के साथ आ रही हैं।
टीएमसी और लेफ्ट भी दिख रहे साथ साथ...
ख़ास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और लेफ़्ट का 36 का आंकड़ा है, लेकिन इस कार्यक्रम के बहाने दोनों एक मुद्दे साथ दिख रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह बिहार में महागठबंधन तोड़ा, उसके बाद सियासी हलकों में यह चर्चा चलने लगी है कि क्या केजरीवाल के नेतृत्व में अब तीसरे मोर्चे का पुनर्गठन होना शुरू हो रहा है? हालांकि यह कहना अभी बहुत जल्दबाज़ी होगा।
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