बेंगलुरू:
इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने अपने उत्तराधिकारी के. राधाकृष्णन पर नए सिरे से हमला करते हुए विवादास्पद एंट्रिक्स-देवास स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में कारणों का पता लगाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से इस मामले की नए सिरे से जांच कराने का आग्रह किया है।
नायर ने कहा, ‘मैंने एक विस्तृत पत्र भेजा है।’ उन्होंने कहा, ‘उन्होंने आरोप लगाए हैं कि मैंने करार में कम सजा का प्रावधान रखा। रक्षा जरूरतें पूरी नहीं की गईं इत्यादि इत्यादि। इन बिंदुओं को मैंने उन्हें एक एक करके स्पष्ट किया है।’
नायर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी को पत्र भेजा है क्योंकि वह आधिकारिक जानकारियों के आधार पर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैंने सोचा कि उन्हें (नारायणसामी को) पता होना चाहिए कि आधिकारिक रिपोर्टों से परे भी कुछ चीजें हैं। इसका पूरा मकसद यही है।’ बीके चतुर्वेदी और रोड्डम नरसिंहा की दो सदस्यीय समिति ने एंट्रिक्स-देवास समझौते के तकनीकी, व्यावसायिक, प्रक्रियात्मक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की और उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि देवास को स्पेक्ट्रम की बिक्री की चिंताओं का कुछ भी आधार नहीं है।
लेकिन, प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का कहना था, ‘...न केवल प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक खामियां हुईं बल्कि कुछ लोगों की ओर से कपटपूर्ण कार्रवाई की बात भी सामने आई है।’
नायर ने कहा, ‘मैंने एक विस्तृत पत्र भेजा है।’ उन्होंने कहा, ‘उन्होंने आरोप लगाए हैं कि मैंने करार में कम सजा का प्रावधान रखा। रक्षा जरूरतें पूरी नहीं की गईं इत्यादि इत्यादि। इन बिंदुओं को मैंने उन्हें एक एक करके स्पष्ट किया है।’
नायर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी को पत्र भेजा है क्योंकि वह आधिकारिक जानकारियों के आधार पर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैंने सोचा कि उन्हें (नारायणसामी को) पता होना चाहिए कि आधिकारिक रिपोर्टों से परे भी कुछ चीजें हैं। इसका पूरा मकसद यही है।’ बीके चतुर्वेदी और रोड्डम नरसिंहा की दो सदस्यीय समिति ने एंट्रिक्स-देवास समझौते के तकनीकी, व्यावसायिक, प्रक्रियात्मक और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा की और उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि देवास को स्पेक्ट्रम की बिक्री की चिंताओं का कुछ भी आधार नहीं है।
लेकिन, प्रत्यूष सिन्हा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का कहना था, ‘...न केवल प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक खामियां हुईं बल्कि कुछ लोगों की ओर से कपटपूर्ण कार्रवाई की बात भी सामने आई है।’