
मुंबई:
आज से तीन साल पहले जब भारतीय रीटेलर फ्यूचर ग्रुप ने देशभर में अपने सुपरमार्केटों को सप्लाई भेजने के लिए नागपुर के छोर पर अपना वेयरहाउस (गोदाम) स्थापित किया था, उसके चारों ओर दूर-दूर तक सिर्फ चटियल मैदान ही नज़र आते थे, लेकिन अब वहां चारों तरफ ढेरों डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर, स्टोरेज डिपो और फैक्टरियां दिखाई देती हैं...
लगभग 25 लाख की आबादी वाले इस शहर की एक और खासियत यह है कि इसे भारत का 'ज़ीरो माइल' शहर कहा जाता है, यानी यह शहर ब्रिटिश काल से ही देश का भौगोलिक केंद्रबिंदु है...
...और अब भी जैसे-जैसे केंद्र सरकार जीएसटी के रूप में आज़ादी के बाद से देश के वित्तीय ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है, यहां भी काफी तेज़ी से काफी गतिविधियां हो रही हैं... योजना के मुताबिक, अगले साल अप्रैल में लागू होने जा रहा जीएसटी, यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स देशव्यापी मूल्यवर्द्धित कर होगा, जो बहुत-से स्थानीय करों को खत्म कर देगा...
बहरहाल, फिलहाल नागपुर को जीएसटी की वजह से फायदा अभी से होने लगा है... जीएसटी के बाद कंपनियों को अपना सामान एक से दूसरे राज्य में भेजने पर बार-बार स्थानीय चुंगी अदा नहीं करनी पड़ेगी, सो, देश के बीचोंबीच होने की वजह से नागपुर में ज़मीनों का दाम बहुत ऊपर जा रहे हैं, क्योंकि अमेज़ॉन से लेकर ट्रैक्टर निर्माता जॉन डीयर तक ने परिवहन खर्च घटाने के लिए नागपुर में इकाइयां स्थापित करना शुरू कर दिया है...
फ्यूचर ग्रुप के संयुक्त प्रबंध निदेशक (ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर) राकेश बियानी ने कहा, "नागपुर का फायदे का कारण बहुत सीधा है... देश का हर बड़ा शहर यहां से सिर्फ 900 किलोमीटर की दूरी पर है..."
परफॉरमेंस इम्प्रूवमेंट में विशेषज्ञता रखने वाली सलाहकार कंपनी अल्वारेज़ एंड मार्सल का अनुमान है कि अगर कंपनियां अपने गोदाम नागपुर में स्थापित कर लें, तो वे अपने लॉजिस्टिक्स खर्च में 25 फीसदी तक की कमी ला सकते हैं.
फ्यूचर ग्रुप नागपुर में अपने कब्ज़े में मौजूद ज़मीन को चार गुणा करने की तैयारी में है, ताकि नागपुर को अपना सबसे बड़ा गोदाम बना सके, जहां से देशभर में फैले उसके 250 से ज़्यादा 'बिग बाज़ार' सुपरमार्केटों को सप्लाई भेजी जा सके.
महिंद्रा ग्रुप के सह-स्वामित्व वाले महिंद्रा लॉजिस्टिक्स ने अगस्त में नए कर को मंज़ूरी मिलने के बाद से ही नागपुर में ज़मीन खरीदने की अपनी योजनाओं को तेज़ कर दिया है. इसके अलावा ई-कॉमर्स के क्षेत्र की बड़ी कंपनी फ्लिपकार्ट और योगगुरु से व्यापारी बने बाबा रामदेव भी नागपुर में या तो गोदाम स्थापित कर रहे हैं, या उसकी योजना बना रहे हैं.
दूसरी ओर, नागपुर राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण शहर है... केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वैचारिक संरक्षक कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी यहीं है, और यहां से सांसद भी बीजेपी के मजबूत नेताओं में शुमार किए जाने वाले केंद्रीय यातायात एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी हैं. नितिन गडकरी भी कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से अब तक सरकार नागपुर से जुड़े 25,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्टों को मंज़ूरी दे चुकी है, जिनमें नई रिंग रोड पर काम तथा मुंबई से जोड़ने के लिए ड्राई पोर्ट की खातिर ज़मीन खरीदने की परियोजनाएं शामिल हैं.
© Thomson Reuters 2016
लगभग 25 लाख की आबादी वाले इस शहर की एक और खासियत यह है कि इसे भारत का 'ज़ीरो माइल' शहर कहा जाता है, यानी यह शहर ब्रिटिश काल से ही देश का भौगोलिक केंद्रबिंदु है...
...और अब भी जैसे-जैसे केंद्र सरकार जीएसटी के रूप में आज़ादी के बाद से देश के वित्तीय ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है, यहां भी काफी तेज़ी से काफी गतिविधियां हो रही हैं... योजना के मुताबिक, अगले साल अप्रैल में लागू होने जा रहा जीएसटी, यानी गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स देशव्यापी मूल्यवर्द्धित कर होगा, जो बहुत-से स्थानीय करों को खत्म कर देगा...
बहरहाल, फिलहाल नागपुर को जीएसटी की वजह से फायदा अभी से होने लगा है... जीएसटी के बाद कंपनियों को अपना सामान एक से दूसरे राज्य में भेजने पर बार-बार स्थानीय चुंगी अदा नहीं करनी पड़ेगी, सो, देश के बीचोंबीच होने की वजह से नागपुर में ज़मीनों का दाम बहुत ऊपर जा रहे हैं, क्योंकि अमेज़ॉन से लेकर ट्रैक्टर निर्माता जॉन डीयर तक ने परिवहन खर्च घटाने के लिए नागपुर में इकाइयां स्थापित करना शुरू कर दिया है...
फ्यूचर ग्रुप के संयुक्त प्रबंध निदेशक (ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर) राकेश बियानी ने कहा, "नागपुर का फायदे का कारण बहुत सीधा है... देश का हर बड़ा शहर यहां से सिर्फ 900 किलोमीटर की दूरी पर है..."
परफॉरमेंस इम्प्रूवमेंट में विशेषज्ञता रखने वाली सलाहकार कंपनी अल्वारेज़ एंड मार्सल का अनुमान है कि अगर कंपनियां अपने गोदाम नागपुर में स्थापित कर लें, तो वे अपने लॉजिस्टिक्स खर्च में 25 फीसदी तक की कमी ला सकते हैं.
फ्यूचर ग्रुप नागपुर में अपने कब्ज़े में मौजूद ज़मीन को चार गुणा करने की तैयारी में है, ताकि नागपुर को अपना सबसे बड़ा गोदाम बना सके, जहां से देशभर में फैले उसके 250 से ज़्यादा 'बिग बाज़ार' सुपरमार्केटों को सप्लाई भेजी जा सके.
महिंद्रा ग्रुप के सह-स्वामित्व वाले महिंद्रा लॉजिस्टिक्स ने अगस्त में नए कर को मंज़ूरी मिलने के बाद से ही नागपुर में ज़मीन खरीदने की अपनी योजनाओं को तेज़ कर दिया है. इसके अलावा ई-कॉमर्स के क्षेत्र की बड़ी कंपनी फ्लिपकार्ट और योगगुरु से व्यापारी बने बाबा रामदेव भी नागपुर में या तो गोदाम स्थापित कर रहे हैं, या उसकी योजना बना रहे हैं.
दूसरी ओर, नागपुर राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण शहर है... केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वैचारिक संरक्षक कहे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी यहीं है, और यहां से सांसद भी बीजेपी के मजबूत नेताओं में शुमार किए जाने वाले केंद्रीय यातायात एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी हैं. नितिन गडकरी भी कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से अब तक सरकार नागपुर से जुड़े 25,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्टों को मंज़ूरी दे चुकी है, जिनमें नई रिंग रोड पर काम तथा मुंबई से जोड़ने के लिए ड्राई पोर्ट की खातिर ज़मीन खरीदने की परियोजनाएं शामिल हैं.
© Thomson Reuters 2016
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