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This Article is From Feb 01, 2022

"उसे अभी भी चीनी हिरासत के बुरे सपने आते हैं": अरुणाचल किशोर के पिता ने NDTV को बताया

उसे 18 जनवरी को अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीनी सेना ने पकड़ लिया था. ​मिरियम अपने परिवार से एलएसी से कुछ ही मील दूर टुटिंग सर्कल के तहत जिदो गांव में मिला.

"उसे अभी भी चीनी हिरासत के बुरे सपने आते हैं": अरुणाचल किशोर के पिता ने NDTV को बताया
मिरियम को 18 जनवरी की शाम छह बजे के बाद बंदूक की नोक पर पकड़ लिया गया था.
गुवाहाटी:

17 वर्षीय मिरियम टैरोन को अभी भी चीनी पीएलए की हिरासत में काटे उन 200 से अधिक घंटों के "बुरे सपने" आते हैं. उसे 18 जनवरी को अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीनी सेना ने पकड़ लिया था. ​मिरियम अपने परिवार से एलएसी से कुछ ही मील दूर टुटिंग सर्कल के तहत जिदो गांव में मिला. यह क्षेत्र भारतीय पक्ष की अंतिम बस्तियों में से एक है. हालांकि वह ठीकठाक घर लौट आया है, लेकिन उसके पिता ओपांग टैरोन ने कहा कि वह अभी भी सदमे में है. उसके पिता ने बताया कि 200 घंटे से अधिक समय तक उसे आंखों पर पट्टी बांधकर और हाथ बांधकर कैद में रखा गया था, जहां उसे हर पल मारे जाने का डर सताता रहता था.

टैरोन ने कहा, "मेरे बेटे को उस क्षेत्र से अगवाह किया गया था जिसे हम अपना भारतीय क्षेत्र मानते हैं. इसे नो मैन्स लैंड कहा जा सकता है, लेकिन वह कभी भी चीनी क्षेत्र में नहीं गया. भारतीय सेना ने इस क्षेत्र में कुछ निशान लगाए हुए हैं और मेरे बेटे या उसके दोस्त ने इसे कभी भी पार नहीं किया. इसलिए, वह चीनी पीएलए थी जो वास्तव में भारतीय सीमा में आई थी."

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पिता टैरोन ने बताया कि मिरियम को 18 जनवरी की शाम छह बजे के बाद बंदूक की नोक पर पकड़ लिया गया था. टैरोन ने NDTV को बताया, "उसने मुझे बताया कि उसे तुरंत आंखों पर पट्टी बांध दी गई. उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसके आसपास एक दर्जन से अधिक पीएलए सैनिक थे, जिसके वजह से वह ऐसा नहीं कर सका. उस समय उसके हाथ भी बंधे हुए थे. हो सकता है कि उन्होंने उसे एक जासूस समझा हो, इसलिए उन्होंने उसे धक्का दिया और उसे मारा भी. उसने कुछ जवाबी कार्रवाई की कोशिश भी की, उसने मुझे बताया कि उसने एक चीनी सैनिक को धक्का दिया. जिसके बाद उन्होंने एक लाइटर जैसे उपकरण से हल्के बिजली के झटके दिए. उसे दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन महसूस कर सकता था. अगले दिन उसके अनुसार उसे प्रताड़ित नहीं किया गया."

जिस क्षेत्र से मिरियम को पकड़ा गया था, वह टुटिंग सर्कल में वही क्षेत्र था जहां चीनी सेना 2018 में सड़क निर्माण उपकरण के साथ घुसी थी और भारत के अंदर 3-4 किमी सड़क बनाने की कोशिश कर रही थी, जब स्थानीय लोगों और भारतीय सेना ने विरोध किया और चीनियों के पीछे हटने तक गतिरोध​ किया. यह क्षेत्र बिशिंग गांव (एलएसी के पास अंतिम भारतीय गांव) से परे है. स्थानीय रूप से, इस क्षेत्र को सियुनला-लुंगथाजोर के नाम से जाना जाता है.

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मिरियम के पिता ने ​कहा, "हमारे यहां एक प्रथागत अनुष्ठान होता है जहां हम शिकार के लिए जाते हैं और फिर अपने शिकार के मांस को सुखाते हैं और अपनी बहनों के परिवार को देते हैं. मेरा बेटा और दूसरा युवक शिकार पर गए थे. यह हमारी प्रथा रही है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है."

उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, मेरे बेटे ने बताया है कि उसे अच्छी तरह से खिलाया पिलाया गया, से ज्यादातर मांस ही परोसा गया. इसके अलावा, चूंकि यहां बहुत ठंडा है, इसलिए मांस उसे गर्म रहने में मदद करता. उन्होंने किबिथू सीमा के पास उसके वापस लौटाने से पहले उसकी आंखों से पट्टी खोली." मिरियम को भारत को दमाई सीमा बिंदु पर सौंपा गया था. जहां से उसे पकड़ा गया था, यह जगह वहां से लगभग 500 किमी दूर है.
 

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