
नई दिल्ली:
गुजरात में बलात्कार के बाद गर्भवती हुई एक 14 साल की लड़की का शुक्रवार को सुबह दस बजे गर्भपात किया जाएगा। डॉक्टरों की एक टीम ने जांच के बाद फैसला किया कि गर्भपात करके ही उसकी जिंदगी बचाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस संबंध में डॉक्टरों के दल को जरूरी फैसला लेने की इजाजत दे दी थी। ऐसे में उन्हें गर्भपात के लिए कोर्ट की इजाजत की अब जरूरत नहीं है।
चार गाइनाकोलॉजिस्ट और एक क्लीनिकल साइकॉलाजिस्ट के पैनल ने कोर्ट के आदेश पर आज लड़की का परीक्षण किया। पैनल में शामिल रिद्धी शुक्ला ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बच्चे को जन्म देने से लड़की के जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
पीड़ित की पहले भी जांच कर चुकीं डॉ. शुक्ला की रिपोर्ट में कहा गया है कि वह 'मानसिक रूप से बेहद परेशान' है और 'बच्चा जनने के लिए शारीरिक रूप से बेहद कमजोर है।' इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस उम्र में गर्भपात और उससे पैदा होने वाले हालात उसके जीवन को गंभीर खतरा पहुंचा सकते हैं।
इस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि अगर डॉक्टरों को जरूरी लगता है तो वह पीड़ित लड़की का गर्भपात कर सकते हैं।
गौरतलब है कि गत फरवरी माह में यह लड़की टॉयफाइड का इलाज कराने के लिए जिस डॉक्टर के पास गई थी, उसने कथित रूप से इसका बलात्कार किया। इसके बाद उसके परिवार वालों ने गर्भपात के लिए आवेदन किया था, जिसे निचली अदालतों सहित गुजरात हाईकोर्ट तक ने ठुकरा दिया। हाईकोर्ट में 25 जुलाई को हुई सुनवाई के वक्त यह लड़की 24 हफ्ते की गर्भवती थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस संबंध में डॉक्टरों के दल को जरूरी फैसला लेने की इजाजत दे दी थी। ऐसे में उन्हें गर्भपात के लिए कोर्ट की इजाजत की अब जरूरत नहीं है।
चार गाइनाकोलॉजिस्ट और एक क्लीनिकल साइकॉलाजिस्ट के पैनल ने कोर्ट के आदेश पर आज लड़की का परीक्षण किया। पैनल में शामिल रिद्धी शुक्ला ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बच्चे को जन्म देने से लड़की के जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
पीड़ित की पहले भी जांच कर चुकीं डॉ. शुक्ला की रिपोर्ट में कहा गया है कि वह 'मानसिक रूप से बेहद परेशान' है और 'बच्चा जनने के लिए शारीरिक रूप से बेहद कमजोर है।' इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस उम्र में गर्भपात और उससे पैदा होने वाले हालात उसके जीवन को गंभीर खतरा पहुंचा सकते हैं।
इस रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि अगर डॉक्टरों को जरूरी लगता है तो वह पीड़ित लड़की का गर्भपात कर सकते हैं।
गौरतलब है कि गत फरवरी माह में यह लड़की टॉयफाइड का इलाज कराने के लिए जिस डॉक्टर के पास गई थी, उसने कथित रूप से इसका बलात्कार किया। इसके बाद उसके परिवार वालों ने गर्भपात के लिए आवेदन किया था, जिसे निचली अदालतों सहित गुजरात हाईकोर्ट तक ने ठुकरा दिया। हाईकोर्ट में 25 जुलाई को हुई सुनवाई के वक्त यह लड़की 24 हफ्ते की गर्भवती थी।
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