मजदूर संगठनों की देशव्यापी हड़ताल पर फैसला शुक्रवार को

मजदूर संगठनों की देशव्यापी हड़ताल पर फैसला शुक्रवार को

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

दो सितंबर को मजदूर संगठनों ने देश भर में हड़ताल का नोटिस दे रखा है। हालांकि सरकार उन्हें रोकने की कोशिश में है, लेकिन दो दिन चली बातचीत कारगर नहीं हो पाई है। फिलहाल अंतिम फैसला शुक्रवार शाम को सभी संगठनों के नेताओं की अहम बैठक में लिया जाएगा।

गुरुवार की बैठक में केन्द्र सरकार ने मजदूर संगठनों के नेताओं से गुजारिश की कि वे हड़ताल पर न जाएं। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, 'हमने सरकार की तरफ से ट्रेड यूनियंस से अपील की है कि वे 2 सितंबर को हड़ताल पर जाने के फैसले पर पुनर्विचार करें।' मजदूरों को हड़ताल से रोकने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने सभी यूनियनों के नेताओं के साथ बैठक की। लेकिन श्रम कानूनों में बदलाव से जुड़े कई अहम मसलों पर मजदूर संगठन नाराज हैं।

मजदूर संगठनों की सबसे बड़ी शिकायत है कि कानूनों में बदलाव को लेकर उनकी राय नहीं ली गई। इन बदलावों की वजह से मजदूरों को नौकरी से निकालना आसान होगा। यही नहीं, मजदूरों की बुनियादी सुरक्षा भी काफी कमजोर पड़ जाएगी। सरकारी निगरानी का तंत्र कमजोर कर दिया जा रहा है और मजदूरों के हड़ताल के हक में कटौती की जा रही है।

सरकार के साथ बैठक के बाद सीटू के अध्यक्ष एके पदमनाभन ने कहा, 'हम खुश नहीं हैं। इंडियन लेबर कांफ्रेन्स के अगले ही दिन मध्य प्रदेश विधान सभा ने कई अहम श्रम कानून बदल दिए।' जबकि एटक  के महासचिव शंकर साहा ने कहा, 'कानून में बदलाव कर मजदूरों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर किया जा रहा है। हमने हड़ताल पर जाने का अपना फैसला वापस नहीं लिया है।'

वहीं इंटक के वाइस प्रेसिडेन्ट अशोक सिंह ने कहा, 'लेबर कानूनों में बदलाव को सरकार को वापस लेना चाहिए। आज की तारीख में हम 2 सितंबर को हड़ताल पर जाने के फैसले पर कायम हैं।'

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सरकार ने भी बैठक के बाद माना कि कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं। धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, 'कुछ मुद्दों पर हममें यह सहमति बनी है कि हम अपनी राय अलग-अलग रखें।' यानी श्रम शक्ति भवन में बुधवार और गुरुवार को दो दौर की बातचीत के बाद भी सरकार और ट्रेड यूनियनों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी बरकरार हैं। अब इंटक के दफ्तर में शुक्रवार शाम को सभी ट्रेड यूनियनों के नेताओं की अहम बैठक होगी। इसमें 2 सिंतबर को देशव्यापी हड़ताल पर जाने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।