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This Article is From Apr 26, 2018

सरकार का जस्टिस जोसेफ का नाम वापस भेजने पर कॉलेजियम के पास ये है विकल्‍प

सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम (न्यायाधीशों की समिति) से कहा कि न्यायमूर्ति के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर पुन: विचार करे. 

सरकार का जस्टिस जोसेफ का नाम वापस भेजने पर कॉलेजियम के पास ये है विकल्‍प
जस्टिस केएम जोसेफ (फाइल फोटो)
  • सरकार ने कहा, कॉलेजियम पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर पुन: विचार करे
  • कॉलेजियम फिर से अपनी सिफारिश दोहराता है, तो सरकार नियुक्ति के लिए बाध्य
  • सरकार इसमें वक्त ले सकती है क्योंकि पुरानी MOP में समय सीमा नहीं है
नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम (न्यायाधीशों की समिति) से कहा कि न्यायमूर्ति के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर पुन: विचार करे. सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने 10 जनवरी को न्यायमूर्ति जोसेफ और सुश्री इन्दु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी.

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जस्टिस के एम जोसफ मामला के क्या हो सकता है 

फिलहाल जारी MOP(मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का पांच जजों का कॉलेजियम केंद्र के जस्टिस के एम जोसफ की सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर नियुक्ति से इंकार के आधार पर विचार करेगा. अगर कॉलेजियम फिर से अपनी सिफारिश दोहराता है, तो सरकार नियुक्ति के लिए बाध्य होगी. लेकिन सरकार इसमें वक्त ले सकती है क्योंकि पुरानी MOP में समय सीमा नहीं है. 

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नई MOP अभी अटकी हुई है क्योंकि केंद्र नियुक्ति में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर वीटो पॉवर चाहती है. लेकिन कॉलेजियम इस वीटो के लिए तैयार नहीं है. इसलिए नया MOP लागू नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट न्यायिक आदेश के जरिए जस्टिस के एम जोसफ की नियुक्ति करने के आदेश जारी कर सकता है, हालांकि ये कम ही देखने को मिलता है.

सूत्रों ने यह जानकारी दी. यह घटनाक्रम वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश स्वीकार करने और उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के मामले में निर्णय स्थगित रखने की कार्यवाही के बाद का है. न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं देने के सरकार के निर्णय पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई है और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इसे ‘परेशानी’ वाला बताया है.

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आपको बता दें कि जस्टिस केएम जोसेफ़ ने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के केन्द्र के आदेश को रद्द कर दिया था. जस्टिस केएम जोसेफ़ के मामले में सरकार की चुप्पी को लेकर कई जजों ने सवाल भी उठाए हैं.

पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर इस मामले में सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि है कि 'जस्टिस के एम जोसेफ़ की नियुक्ति किस वजह से अटकी हुई है? उनका राज्य या उनका धर्म या फिर उत्तराखंड केस में उनका फ़ैसला? क़ानून के मुताबिक़, जजों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की सिफ़ारिश ही अंतिम है. क्या मोदी सरकार क़ानून से ऊपर हो गई है?'

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वहीं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह ने भी ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि 'अगर आप न्यायपालिका की आज़ादी चाहते हैं तो जजों की नियुक्ति पर रोक लगाएं. एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिले. मैं इंदु मल्होत्रा से अपील करती हूं कि वो नियुक्ति को स्वीकार न करें.'

 
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