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This Article is From Jun 10, 2016

राज्यसभा चुनाव : क्या यूपी में भी मायावती बनेंगी कांग्रेस का सहारा

राज्यसभा चुनाव : क्या यूपी में भी मायावती बनेंगी कांग्रेस का सहारा
लखनऊ: उत्तराखंड में कांग्रेस को बचाने के बाद क्या मायावती उत्तरप्रदेश में राज्यसभा की11 सीटों के लिए शनिवार को होने वाले चुनाव में फिर से कांग्रेस को बचाएंगी?  गुरुवार को जब मायावती ने में प्रेस काफ्रेंस की तो अपने चिरपरिचित अंदाज, जहां पहले से लिखा हुआ वक्तव्य ही पढ़ा जाता है और सवालों के जवाब नहीं दिए जाते, उन्होंने न केवल कुछ सवालों के जवाब दिए बल्कि इशारों में कई बातें भी बता दीं। उन्होंने कहा, "कौन समर्थन करेगा, कौन नहीं इसका पता आपको परिणाम आने पर पता चल जाएगा। उत्तर प्रदेश में सपा और बीजेपी अंदर से मिलकर काम कर रहे हैं। वे दोनों कई मुद्दों पर साथ दिखाई दिए हैं।"

कांग्रेस के लिए हो सकती है अच्छी खबर
ये कांग्रेस के लिए अच्छी खबर हो सकती है खासतौर पर कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के लिए जो उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीट जीतना चाहते हैं। बसपा के दो उम्मीदवार राज्यसभा में चुने जाने के बाद भी कुछ वोट रह जाएंगे जो कांग्रेस के लिए काम के साबित हो सकते हैं। इसी पर कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा , "मायावती का बयान उत्साहजनक है उनके 12 विधायक हमारे काम आ सकते हैं। हमें रालोद के अजीत सिंह ने भी समर्थन का भरोसा दिया है। अब बीजेपी देखेगी कि कैसे उसकी हवा निकल रही है।"

जटिल हो गया है उप्र में राज्यसभा चुनाव का गणित
बीजेपी ने रास चुनाव के सरल गणित को जटिल बना दिया है, वरना पहले 11 सीटों के लिए 11 उम्मीदवार थे लेकिन बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति महापात्रा को समर्थन दे कर उम्मीदवारों की संख्या 12 कर दी है जिससे चुनाव निश्चित हो गए हैं जिसका सिब्बल पर सबसे ज्यादा असर होने की संभावना है। शनिवार को उप्र में हर उम्मीदवार को जीत के लिए  विधानसभा में 34 वोट चाहिए। कांग्रेस के 29 विधायक हैं जबकि कपिल सिब्बल द्वारा आयोजित भोज में केवल 23 विधायक ही शामिल हो पाए थे। अजीत सिंह की रालोद के आठ विधायक हैं लेकिन उनकी पहनी पसंद सपा है जिसके सात उम्मीदवार हैं और छह तो जीत जाएंगे लेकिन सांतवे को मदद की जरूरत पड़ेगी।

मुश्किल है प्रीति महापात्रा की राह
बीजेपी के पास  अपने उम्मीदवार शिव प्रताप शुक्ला के लिए तो वोट हैं लेकिन महापात्रा को 27 गैर बीजेपी उम्मीदवारों की जरूरत पड़ेगी जो कि छोटी पार्टियों और निर्दलीयों की संख्या से ज्यादा है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि दूसरी पार्टियों से क्रास वाटिंग की संभावना तो है लेकिन 27 की संख्या ज्यादा है। इसीलिए उनका मानना है कि कपिल सिब्बल की हार मुश्किल हो सकती है, लेकिन पार्टी अपनी कोशिशें नहीं छोड़ेगी।

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