प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की जमीनी हकीकत बयां कर रहे खाद्य मंत्रालय के आंकड़े

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अप्रैल से जून महीने के बीच कई अहम राज्य लाखों गरीबों को अनाज नहीं बांट पाए

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की जमीनी हकीकत बयां कर रहे खाद्य मंत्रालय के आंकड़े

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

देश में लाखों गरीब ज़रूरतमंदों तक लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त अनाज नहीं पहुंच सका. खाद्य मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल से जून महीने के बीच कई अहम राज्य इस योजना के तहत लाखों गरीबों में अनाज नहीं बांट पाए. सबसे ज्यादा संकट मुफ्त में बंटने वाली दाल को लेकर रहा.  

सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के  तहत 80 करोड़ गरीबों को नवम्बर तक मुफ्त में अनाज देने का ऐलान तो किया है लेकिन खाद्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल, मई और जून में कई राज्य लाखों गरीबों तक मुफ्त में अनाज नहीं पहुंचा पाए. 

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का कार्यान्वयन पश्चिम बंगाल सरकार को अप्रैल से जून 2020 के बीच 9.02 लाख मीट्रिक टन अनाज आवंटित किया गया. इसमें से 5. 31 लाख मीट्रिक टन ही गरीबों को वितरित हुआ. यानी सिर्फ 59% गरीबों को मिला. इन तीन महीनों में मध्यप्रदेश और सिक्किम कुल अनाज का 68% गरीबों को आवंटित कर पाए. इन तीन महीनों में बिहार सरकार को 12.96 लाख मीट्रिक टन अनाज दिया गया जिसमें से वह 9.74 लाख मीट्रिक टन ही आवंटित कर पाई. बिहार में 25% लाभार्थियों तक मुफ्त का अनाज नहीं पहुंच सका.

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक सबसे खराब स्थिति दाल की रही है. मुफ्त दाल के बंटवारे में जून महीने में बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा सरकार ने दाल का 0% आवंटन किया यानी एक भी गरीब व्यक्ति को दाल नहीं मिल पाई. जबकि तेलंगाना ने 10.55% और महाराष्ट्र सरकार सिर्फ 40.30% गरीबों को मुफ्त में दाल बांट पाई.   

सवाल बिना राशन कार्ड वाले माइग्रेंट वर्करों को मुफ्त अनाज आवंटित करने की योजना को लेकर भी उठ रहे हैं. पूर्व सुप्रीम कोर्ट फूड कमिश्नर एनसी सक्सेना ने NDTV से कहा-"प्रवासी मजदूरों को फ्री में अनाज का वितरण 15% से 20% तक ही हो पाया क्योंकि प्रवासी मजदूरों की संख्या की सही जानकारी नहीं है और उनकी पहचान भी मुश्किल है. देश में फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया के गोदामों में जरूरत से ज्यादा अनाज है लेकिन हम मुफ्त में गरीबों को नहीं बांट पा रहे हैं. 

सुप्रीम कोर्ट के फ़ूड कमिश्नर रहे एनसी सक्सेना कहते हैं कि संकट बड़ा है. पिछले कुछ सालों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के लाभार्थियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है. इस वजह से करोड़ों गरीब, ज़रूरतमंद लोग इसमें शामिल ही नहीं किए जा सके हैं.  


एनसी सक्सेना ने  NDTV से कहा कि"नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट (NFSA) के तहत लाभार्थियों की लिस्ट हर साल बढ़नी चाहिए.  लेकिन 4 से 5 साल से यह अपडेट नहीं हुई है. मेरा अनुमान है कि 4 करोड़ से 5 करोड़ लोग इसमें जोड़े जाने चाहिए थे जो अब तक NFSA में शामिल नहीं किए गए हैं."

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साफ़ है राज्यों में प्रशासनिक खामियों को अगर समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया तो अगले पांच महीने में करोड़ों गरीबों तक मुफ्त में अनाज पहुंचाने की योजना को लेकर सवाल उठते रहेंगे.