अस्पताल के बाहर का दृश्य
नई दिल्ली:
दिल्ली का एक परिवार अपने नवजात बच्चे के साथ 4 घंटे तक दिल्ली के चार अस्पतालों का चक्कर लगाता रहा, लेकिन किसी ने भी बच्चे को भर्ती नहीं किया, आखिर बच्चे ने इस दुनिया में आंखें खोलने से पहले ही बंद कर ली।
दरअसल, बच्चे का जन्म दिल्ली के बुध विहार के मुस्कान नर्सिंग होम में हुआ था। बच्चा प्रीमेच्योर था और नर्सिंग होम वालों ने दस हज़ार रुपये प्रति दिन के हिसाब से बच्चे को एडमिट करने का खर्च बताया। गरीब परिवार इतना खर्च को उठा नहीं सकता था इसलिए वे बच्चे को सरकारी अस्पताल ले गए।
परिवार पहले एम्बुलेंस से बारी-बारी से कलावती अस्पताल, आरएमएल, एलएनजेपी ले गए, लेकिन सभी जगह भर्ती करने से मना कर दिया गया।
आखिर 1 घंटे तक परिवार के विरोध करने पर एलएनजेपी वाले भर्ती को तैयार हो गए। बच्चा एंबुलेंस में वेंटिलेटर पर था। उसे वार्ड तक ले जाने के लिए पोर्टेबल सिलेंडर का इंतज़ाम नहीं हो सका और जैसे ही बच्चे का ऑक्सीजन हटाया गया उसकी मौत हो गई।
दरअसल, बच्चे का जन्म दिल्ली के बुध विहार के मुस्कान नर्सिंग होम में हुआ था। बच्चा प्रीमेच्योर था और नर्सिंग होम वालों ने दस हज़ार रुपये प्रति दिन के हिसाब से बच्चे को एडमिट करने का खर्च बताया। गरीब परिवार इतना खर्च को उठा नहीं सकता था इसलिए वे बच्चे को सरकारी अस्पताल ले गए।
परिवार पहले एम्बुलेंस से बारी-बारी से कलावती अस्पताल, आरएमएल, एलएनजेपी ले गए, लेकिन सभी जगह भर्ती करने से मना कर दिया गया।
आखिर 1 घंटे तक परिवार के विरोध करने पर एलएनजेपी वाले भर्ती को तैयार हो गए। बच्चा एंबुलेंस में वेंटिलेटर पर था। उसे वार्ड तक ले जाने के लिए पोर्टेबल सिलेंडर का इंतज़ाम नहीं हो सका और जैसे ही बच्चे का ऑक्सीजन हटाया गया उसकी मौत हो गई।
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