नई दिल्ली:
दिल्ली में हुए गैंगरेप मामले में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की ओर से दायर की गई याचिका खारिज हो गई है। इस याचिका पर सुनवाई करने वाले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने फैसले में कहा कि स्वामी इस मामले में पार्टी ही नहीं हैं, इसलिए उनकी याचिका खारिज की जा रही है।
स्वामी ने अपनी याचिका में मांग की थी कि छठे नाबालिग आरोपी को भी बालिग माना जाए और उसका केस भी बाकी आरोपियों की तरह फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए। हालांकि इसी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई चलती रहेगी।
प्रधान मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल की अध्यक्षता वाले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने इस बारे में जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि नाबालिग आरोपी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाए, क्योंकि उसका अपराध जघन्य था और कहीं से नहीं लगता कि यह किसी किशोर की करतूत थी।
स्वामी ने याचिका के जरिये मांग की थी कि मामले के अन्य आरोपियों की तरह ही किशोर आरोपी पर भी मुकदमा चलाया जाए और याचिका में उन्होंने ने किशोर न्याय कानून और भारतीय दंड संहिता में कई खामियां भी गिनाई थीं। उल्लेखनीय है कि इस मामले पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में इस अभियुक्त का नाम भले ही शामिल नहीं किया गया था, परंतु इसकी हरकतों का जिक्र किया गया था।
चार्जशीट के मुताबिक यही नाबालिग आरोपी पीड़ित लड़की के प्रति सबसे ज़्यादा नृशंस रहा था। इस अभियुक्त ने लड़की के साथ दो बार बलात्कार किया, और उनमें से एक बार तो उस समय किया, जब लड़की बेहोश हो चुकी थी। इसके अलावा इसी लड़के ने अपने हाथों से लड़की की अंतड़ियों को बाहर खींच निकाला था, और इसी अभियुक्त ने पीड़ित लड़की और उसके मित्र को चलती बस से नीचे फेंक देने का सुझाव दिया था।
स्वामी ने अपनी याचिका में मांग की थी कि छठे नाबालिग आरोपी को भी बालिग माना जाए और उसका केस भी बाकी आरोपियों की तरह फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए। हालांकि इसी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई चलती रहेगी।
प्रधान मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल की अध्यक्षता वाले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने इस बारे में जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि नाबालिग आरोपी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाए, क्योंकि उसका अपराध जघन्य था और कहीं से नहीं लगता कि यह किसी किशोर की करतूत थी।
स्वामी ने याचिका के जरिये मांग की थी कि मामले के अन्य आरोपियों की तरह ही किशोर आरोपी पर भी मुकदमा चलाया जाए और याचिका में उन्होंने ने किशोर न्याय कानून और भारतीय दंड संहिता में कई खामियां भी गिनाई थीं। उल्लेखनीय है कि इस मामले पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में इस अभियुक्त का नाम भले ही शामिल नहीं किया गया था, परंतु इसकी हरकतों का जिक्र किया गया था।
चार्जशीट के मुताबिक यही नाबालिग आरोपी पीड़ित लड़की के प्रति सबसे ज़्यादा नृशंस रहा था। इस अभियुक्त ने लड़की के साथ दो बार बलात्कार किया, और उनमें से एक बार तो उस समय किया, जब लड़की बेहोश हो चुकी थी। इसके अलावा इसी लड़के ने अपने हाथों से लड़की की अंतड़ियों को बाहर खींच निकाला था, और इसी अभियुक्त ने पीड़ित लड़की और उसके मित्र को चलती बस से नीचे फेंक देने का सुझाव दिया था।
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