
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इस महीने के आखिर में दो दिन की जापान यात्रा पर जाएंगे। रक्षा मंत्री बनने के बाद पर्रिकर की यह पहली विदेश यात्रा होगी। पर्रिकर 30 और 31 मार्च को जापान में रहेंगे। पर्रिकर की जापान यात्रा रणनीतिक नजरिए काफी अहम है, क्योंकि जापान के साथ भारत के बढ़ते सामरिक संबंधों को लेकर पड़ोसी देश चीन पहले से ही भौंहें ताने हुए है।
भारत के रक्षा मंत्री की ये विदेश यात्रा 17 महीने बाद हो रही है। इससे पहले पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी नवम्बर 2013 में रूस की यात्रा पर गए थे। इन 17 महीनों में 30 देशों के रक्षा मंत्री भारत की यात्रा पर आ चके हैं।
पर्रिकर की यात्रा के दौरान भारत जापान से 12 यूएस 2 विमान खरीदने के बारे में अंतिम फैसला ले सकता है। ये टोही विमान जमीन और समुद्र दोनों जगह उतर सकता है। वैसे हाल के सालों में भारत, जापान और अमेरिका सैन्य क्षेत्र में काफी करीब आ रहे हैं, खासकर नौसेना के मालाबार सीरीज अभ्यास के जरिए, ये तीनों मुल्क काफी करीब आए हैं। इससे चीन काफी खफा है, क्योंकि उसे लग रहा है कि ये सब चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी हो रही है।
चीन का जापान से टकराव का लंबा इतिहास है और वह जापान को अपने लिए एक खतरे के रूप में देखता रहा है। इसमें भारत और अमेरिका के साथ आ जाने से उसका चिंतित होना लाजिमी है।
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