नई दिल्ली:
कल दिल्ली के जंतर मंतर पर AAP की किसान रैली में किसान की मौत ऐसे कई सवाल उठाती है जिनके जवाब सामने आए बिना इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझना नामुमकिन लगता है। पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की जांच में लगी हैं और नेताओं द्वारा इस पर राजनीतिक व गैरराजनीतिक बयानों का आना जारी है।
गजेंद्र सिंह के बारे में जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, वैसे-वैसे ये हैरानी बढ़ती जा रही है कि सामाजिक और राजनीतिक तौर पर इतने सक्रिय शख्स ने ख़ुदकुशी क्यों की। परिवार इसकी जांच की मांग कर रहा है क्योंकि गांव से निकलते हुए गजेंद्र ने कहीं अपने हताश होने या ख़ुदकुशी करने के इरादे का कोई संकेत नहीं दिया था।
गजेंद्र सिंह के अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ आया। गांव में मातम भी है और हैरानी भी। दिल्ली से गांव आए गजेंद्र सिंह के फूफाजी बताते हैं कि रैली में जाने से कुछ ही घंटे पहले गजेंद्र घर आया था और उसने रैली के बाद फुरसत में मिलने की बात कही थी।
किसान गजेंद्र सिंह की कथित खुदकुशी को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच आइए जरा इन बिंदुओं पर गौर करें और उस गुत्थी को समझने की कोशिश करें जिससे यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि यह खुदकुशी है या हादसा..
1- गजेंद्र सिंह के पास 17 बीघा ज़मीन है। वह गंभीर आर्थिक तंगी में नहीं था।
2- गजेंद्र की गेहूं की पूरी फसल चौपट नहीं हुई थी यानी वह बेहद बेहद निराशा की गर्त में नहीं था। केवल आंवले की खेती को नुकसान पहुंचा था।
3- गजेंद्र के जानने वालों और रिश्तेदारों के मुताबिक, वह राजनीतिक तौर पर सक्रिय था।

4- गजेंद्र किसानों के मुद्दों पर लड़ता था।
5- मौत से पहले रिश्तेदार को फोन किया था और कहा था कि 10 मिनट में टीवी पर दिखने की बात कही थी।
6- गजेंद्र बाकायदा सज धज कर रैली में अपनी बात रखने के लिए आया था।
7- गजेन्द्र पगड़ी बांधने में एक्सपर्ट था और खुद कई बड़ी हस्तियों के लिए पगड़ी बांध चुका था।
8- गजेंद्र के एक दोस्त सुरेंद्र ने हमारे सहयोगी हिमांशु को कहा, गजेंद्र उत्साही व्यक्ति था और 42 साल की उम्र का था.. वह केवल आवाज उठाने के लिए गया था। वह आत्महत्या करने नहीं गया था।
गजेंद्र सिंह के बारे में जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, वैसे-वैसे ये हैरानी बढ़ती जा रही है कि सामाजिक और राजनीतिक तौर पर इतने सक्रिय शख्स ने ख़ुदकुशी क्यों की। परिवार इसकी जांच की मांग कर रहा है क्योंकि गांव से निकलते हुए गजेंद्र ने कहीं अपने हताश होने या ख़ुदकुशी करने के इरादे का कोई संकेत नहीं दिया था।
गजेंद्र सिंह के अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ आया। गांव में मातम भी है और हैरानी भी। दिल्ली से गांव आए गजेंद्र सिंह के फूफाजी बताते हैं कि रैली में जाने से कुछ ही घंटे पहले गजेंद्र घर आया था और उसने रैली के बाद फुरसत में मिलने की बात कही थी।
किसान गजेंद्र सिंह की कथित खुदकुशी को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच आइए जरा इन बिंदुओं पर गौर करें और उस गुत्थी को समझने की कोशिश करें जिससे यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि यह खुदकुशी है या हादसा..
1- गजेंद्र सिंह के पास 17 बीघा ज़मीन है। वह गंभीर आर्थिक तंगी में नहीं था।
2- गजेंद्र की गेहूं की पूरी फसल चौपट नहीं हुई थी यानी वह बेहद बेहद निराशा की गर्त में नहीं था। केवल आंवले की खेती को नुकसान पहुंचा था।
3- गजेंद्र के जानने वालों और रिश्तेदारों के मुताबिक, वह राजनीतिक तौर पर सक्रिय था।

4- गजेंद्र किसानों के मुद्दों पर लड़ता था।
5- मौत से पहले रिश्तेदार को फोन किया था और कहा था कि 10 मिनट में टीवी पर दिखने की बात कही थी।
6- गजेंद्र बाकायदा सज धज कर रैली में अपनी बात रखने के लिए आया था।
7- गजेन्द्र पगड़ी बांधने में एक्सपर्ट था और खुद कई बड़ी हस्तियों के लिए पगड़ी बांध चुका था।
8- गजेंद्र के एक दोस्त सुरेंद्र ने हमारे सहयोगी हिमांशु को कहा, गजेंद्र उत्साही व्यक्ति था और 42 साल की उम्र का था.. वह केवल आवाज उठाने के लिए गया था। वह आत्महत्या करने नहीं गया था।

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