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This Article is From Apr 07, 2017

चीन की नाराजगी नजरअंदाज कर दलाई लामा तवांग पहुंचे, बेहद गर्मजोशी से हुआ स्‍वागत

चीन की नाराजगी नजरअंदाज कर दलाई लामा तवांग पहुंचे, बेहद गर्मजोशी से हुआ स्‍वागत
दलाई लामा की यात्रा के मद्देनजर अरुणाचल में पिछले दो महीने से तैयारियां की जा रही थीं. (फाइल फोटो)
  • बौद्ध भिक्षुओं तथा श्रद्धालुओं ने उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया.
  • दलाई लामा सन् 1959 से ही भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं.
  • तवांग मठ गोलुगपा स्कूल ऑफ महायान बुद्धिज्म से जुड़ा है.
तवांग (अरुणाचल प्रदेश): तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा चीन की नाराजगी को नजरअंदाज कर शुक्रवार को तवांग मठ पहुंच गए. मठ में बौद्ध भिक्षुओं तथा कई श्रद्धालुओं ने उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा तवांग मठ में ठहरेंगे. यह मठ भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है. दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ तिब्बत का पोटला पैलेस है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तिब्बती धर्मगुरु के साथ हैं. दलाई लामा सन् 1959 से ही भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं. बर्फ से घिरे पहाड़ों तथा 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित तवांग में मोनपा लोग रहते हैं, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं.
 
dalai lama
(फोटो- तवांग मठ पहुंचे आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा)

दलाई लामा के दौरे के मद्देनजर पूरे तवांग को भारत तथा तिब्बत के झंडों तथा फूलों के अलावा, रंगीन प्रार्थना झंडों से सजाया गया. सड़कों को रंगा गया और नालों की सफाई की गई. ('दलाई लामा हमारे दोस्त हैं, चीन कौन होता है दखल देने वाला')

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "सैकड़ों की तादाद में लोग पारंपरिक औपचारिक स्कार्फ लिए हुए सड़क पर अगरबत्तियां जलाकर दलाई लामा के दर्शन तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कतार में खड़े थे." दलाई लामा की एक झलक पाने के लिए लद्दाख तथा पड़ोसी देश भूटान से हजारों की तादाद में लोग तवांग पहुंच चुके हैं.

मठ के सचिव लोबसांग खुम ने कहा, "हम दलाई लामा की यात्रा की तैयारी पिछले दो महीने से कर रहे हैं. हर कोई उनकी एक झलक पाना, उनसे बातें करना और उनका आशीर्वाद लेना चाहता है. दलाई लामा हमारे श्रद्धेय धर्मगुरु हैं." (दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर थम नहीं रहा चीन का गुस्सा, कहा- रिश्तों पर पड़ेगा 'बुरा असर')

तवांग मठ गोलुगपा स्कूल ऑफ महायान बुद्धिज्म से जुड़ा है और इसका संबंध ल्हासा के द्रेपुंग मठ से है, जो ब्रिटिश काल से ही बरकरार है. सन् 1959 में तिब्बत से निर्वासित होने के बाद असम पहुंचने से पहले दलाईलामा कुछ दिनों के लिए तवांग मठ में ठहरे थे.

दलाई लामा सबसे पहले बोमडिला पहुंचे, जो अरुणाचल प्रदेश में पश्चिमी कामेंग का जिला मुख्यालय है, जहां उन्होंने धार्मिक प्रवचन दिया और लोगों से बातचीत की.

उसके बाद वह तवांग से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित दिरांग घाटी पहुंचे, जहां उन्होंने थूपसंग धारगेलिंग मठ में गुरुवार को प्रवचन दिया. वह शुक्रवार को ही दिन में सड़क मार्ग के जरिये दिरांग से तवांग के लिए रवाना हुए थे. यह आठ वर्षों के बाद दलाई लामा का पहला अरुणाचल दौरा होगा. दलाई लामा ने इस पहाड़ी राज्य का पहला दौरा सन् 1983 में किया था और अंतिम दौरा सन् 2009 में किया था. चीन ने दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे का विरोध किया है. वह अरुणाचल को अपना हिस्सा मानता है. (इनपुट आईएएनस से)
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