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This Article is From Nov 03, 2013

चुनावों के दौरान ओपिनियन पोल पर रोक के पक्ष में है कांग्रेस, चुनाव आयोग को दी राय

चुनावों के दौरान ओपिनियन पोल पर रोक के पक्ष में है कांग्रेस, चुनाव आयोग को दी राय
नई दिल्ली:

चुनावों के दौरान ओपिनियन पोल के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने के चुनाव आयोग के विचार का समर्थन करते हुए कांग्रेस ने कहा कि रैन्डम सर्वे ‘त्रुटिपूर्ण’ होते हैं और उनमें ‘विश्वसनीयता की कमी’ होती है। साथ ही पार्टी ने कहा कि निहित स्वार्थों के लिए उनमें ‘तोड़ मरोड़’ किया जा सकता है।

सरकार ने ओपिनियन पोल के मुद्दे पर आयोग को फिर विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया था जिसके बाद आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों से पिछले महीने विचार मांगे थे।

निर्वाचन आयोग को 30 अक्तूबर को लिखित जवाब में कांग्रेस ने कहा कि वह ‘चुनावों के दौरान ओपिनियन पोल के प्रकाशन एवं प्रसारण पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के विचारों को पूरा समर्थन देता है।’

आयोग को पार्टी के आधिकारिक रुख से अवगत कराते हुए कांग्रेस के कानूनी एवं मानवाधिकार विभाग के सचिव केसी मित्तल ने कहा, ‘वास्तव में चुनावों के दौरान ओपिनियन पोल न तो वैज्ञानिक हैं और न ही ऐसे पोल की पारदर्शी प्रक्रिया होती है।’

पार्टी ने कहा कि रेंडम सर्वे में ‘विश्वसनीयता की कमी’ होती है और ‘निहित स्वार्थ’ वाले लोग इसमें ‘तोड़ मरोड़’ कर सकते हैं।

इसने कहा कि ओपिनियन पोल लोकतांत्रिक संस्थानों की मजबूती में सहयोग नहीं करते और ज्यादातर बार वे ‘त्रुटिपूर्ण’ होते हैं क्योंकि ये अधिकांश मतदाताओं के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

मित्तल ने कहा, ‘चुनाव आयोग के दायित्व के तहत यह मूल चुनावी अवधारणा के विपरीत है। हम चुनाव आयोग की पहल की प्रशंसा करते हैं।’ चुनाव आयोग ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों से 21 अक्तूबर तक अपने विचार देने को कहा था।

फिलहाल मतदान के 48 घंटे पहले से ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध है। सभी मान्यता प्राप्त दलों के अध्यक्षों, महासचिवों को लिखे पत्र में आयोग ने कहा, ‘आयोग चाहता है कि चुनाव के दौरान ओपिनियन पोल कराने और इसके परिणामों को प्रकाशित, प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव के बारे में आयोग को अवगत कराया जाए। कृपया 21 अक्तूबर 2013 तक अपने विचार से अवगत कराएं।’

इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार को प्रस्ताव दिया था कि ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध लगाया जाए जिसके बाद सरकार ने आयोग से कहा कि इस मुद्दे पर वह विभिन्न दलों के साथ फिर विचार-विमर्श करे।

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