CM योगी ने UP के उस शहर का किया दौरा, जहां से हुआ था 'हिन्दू परिवारों का पलायन'

कैराना के लोगों से मुलाकात के बाद सीएम योगी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कैराना जैसी जगहों ने 1990 के दशक से शुरू हुई राजनीति के अपराधीकरण और राजनीति में इन अपराधियों के शामिल होने के नकारात्मक प्रभावों से निपटा है.

CM योगी ने UP के उस शहर का किया दौरा, जहां से हुआ था 'हिन्दू परिवारों का पलायन'

यूपी के सीएम योगी ने कैराना का किया दौरा.

कैराना:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi) ने आज सोमवार को कैराना (Kairana) जिले का दौरा किया. यूपी के पश्चिमी हिस्से में स्थित कैराना 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय मुस्लिम आपराधिक गिरोहों के कारण क्षेत्र से हिंदू परिवारों के कथित पलायन के लिए चर्चा में था. कैराना में 50 फीसदी मुस्लिम आबादी है. बीजेपी ने 2017 के चुनावों के लिए अपने प्रचार में इस मुद्दे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था.

योगी आदित्यनाथ के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और क्षेत्र से पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधि भी थे. कैराना की उनकी यात्रा को पार्टी द्वारा 2022 के चुनावों से पहले इस मुद्दे को पुनर्जीवित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शूट किए गए दृश्यों में मुख्यमंत्री और अन्य लोगों को उन लोगों के परिवारों के साथ मुलाकात करते हुए दिखाया गया है जो कथित तौर पर 2017 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद कैराना लौट आए हैं.

कैराना के लोगों से मुलाकात के बाद सीएम योगी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा. "कैराना जैसी जगहों ने 1990 के दशक से शुरू हुई राजनीति के अपराधीकरण और राजनीति में इन अपराधियों के शामिल होने के नकारात्मक प्रभावों से निपटा है. हिंदू व्यापारियों और अन्य हिंदुओं को यहां से पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था. इसने देश भर में सुर्खियां बटोरीं. 2017 के बाद हमने यहां अपराध और शांति के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की. कई परिवार लौट आए हैं."

इस मुद्दे को पहली बार 2016 में भाजपा नेता दिवंगत हुकुम सिंह ने उठाया था, जो कैराना सीट से सात बार विधायक रहे थे और 2018 में अपनी मृत्यु से पहले यहां के सांसद थे. हुकुम सिंह ने हिंदू परिवारों की सूची जारी की थी, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया था कि वे कैराना से भाग गए थे. मीडिया द्वारा उनके दावों पर प्रकाशित रिपोर्ट के बाद हुकुम सिंह ने कहा था कि यह एक सांप्रदायिक मुद्दा नहीं था, बल्कि केवल कानून और व्यवस्था का मुद्दा था.

कैराना विधानसभा सीट 2014 से समाजवादी पार्टी के पास है. 2014 में यहां से लोकसभा चुनाव हुकुम सिंह ने जीता थी. 2018 में उनकी मृत्यु के बाद, राष्ट्रीय लोक दल के उम्मीदवार ने उपचुनाव में कैराना सीट जीती थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां फिर जीत हासिल की थी.

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2022 के विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. विपक्ष का दावा है कि नए कृषि कानूनों को लेकर यहां के किसानों के विरोध ने जाटों और मुसलमानों को एकजुट किया है. जाट और मुसलमान क्षेत्र में एक बड़ा वोट बैंक हैं.