
कांग्रेस नेता सचिन पायलट की फाइल फोटो
जयपुर:
राजस्थान में एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने में कथित रूप से हुए घोटाले में सीबीआई ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के खिलाफ भ्रष्टाचार का आपराधिक मामला दर्ज किया है।
साल 2009 में, ज़िकित्ज़ा हेल्थकेयर नाम की एक कंपनी को राज्य में अस्पतालों या चिकित्सा केंद्र से दूर स्थित ग्रामीण इलाकों में एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया था। तब राज्य अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। वहीं ज़िकित्ज़ा कंपनी का संचालन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि के बेटे रवि कृष्णा करते थे। इसके अलावा कंपनी के निदेशकों में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी शामिल हैं। सीबीआई ने इस बाबत जयपुर और मुंबई में ज़िकित्ज़ा हेल्थ केयर कंपनी के दफ्तर में छापेमारी की। इस कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
साल 2015 में राज्य के ऑडिटर ने पाया कि सिर्फ कागज़ों में मौजूद ज़िकित्ज़ा नाम की इस कंपनी को एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए पैसों का भुगतान किया गया। ऑडिटर ने बताया कि सरकार को इन एम्बुलेंसों के काल्पनिक चक्करों के फर्जी बिल भी थमा दिए गए। आरोप है कि यह पूरा घोटाला दस करोड़ से ज्यादा का है। इस खुलासे के बाद तब विपक्ष में बैठी बीजेपी ने इस मामले में जांच की मांग की थी।
आपको बता दें कि जयपुर के मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर 31 जुलाई 2014 को शहर के अशोक नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी संख्या 256/2014 दर्ज की गई थी। राजस्थान की सत्ता में बीजेपी की वापसी के तुरंत बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें गहलोत, पायलट, रवि कृष्ण और कार्ती चिदंबरम को नामजद आरोपी बनाया गया था।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया, 'आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाड़ा), 468, 471 और 120-बी के तहत लोक सेवकों सहित मुंबई और जयपुर स्थित निजी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। तकनीकी विशिष्टताएं जानबूझकर जोड़कर कंपनी के पक्ष में निविदा जारी करने में हुई कथित अनियमितता को लेकर मामला दर्ज किया गया है।'
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से दर्ज प्राथमिकी में गहलोत, कंपनी के कथित निदेशक पायलट, कार्ती, रवि कृष्ण, ज़िकित्ज़ा हेल्थ केयर, इसके निदेशक श्वेता मंगल, तत्कालीन स्वास्थ्य राज्य मंत्री दुरु मिर्जा और तत्कालीन एनआरएचएम निदेशक को नामजद किया गया था।
हालांकि इस मामले में सचिन पायलट खुद को पाक-साफ बताते हुए कहते हैं कि जांचकर्ताओं ने उन्हें गलत ढंग से कंपनी के निदेशक के तौर पर सूचिबद्ध किया है। पायलट कहते हैं कि उन्होंने ज़िकित्ज़ा के शुरुआति चरण में एक लाभकारी संस्था के तौर पर ग्रामीण इलाकों में मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के लिए पैरवी की थी, लेकिन जब यह कंपनी में तब्दील हो गई तो उन्होंने अपना नाता कंपनी से तोड़ लिया। (एजेंसी इनपुट के साथ)
साल 2009 में, ज़िकित्ज़ा हेल्थकेयर नाम की एक कंपनी को राज्य में अस्पतालों या चिकित्सा केंद्र से दूर स्थित ग्रामीण इलाकों में एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए चुना गया था। तब राज्य अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। वहीं ज़िकित्ज़ा कंपनी का संचालन तत्कालीन केंद्रीय मंत्री व्यालार रवि के बेटे रवि कृष्णा करते थे। इसके अलावा कंपनी के निदेशकों में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम भी शामिल हैं। सीबीआई ने इस बाबत जयपुर और मुंबई में ज़िकित्ज़ा हेल्थ केयर कंपनी के दफ्तर में छापेमारी की। इस कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
साल 2015 में राज्य के ऑडिटर ने पाया कि सिर्फ कागज़ों में मौजूद ज़िकित्ज़ा नाम की इस कंपनी को एम्बुलेंस सेवा मुहैया कराने के लिए पैसों का भुगतान किया गया। ऑडिटर ने बताया कि सरकार को इन एम्बुलेंसों के काल्पनिक चक्करों के फर्जी बिल भी थमा दिए गए। आरोप है कि यह पूरा घोटाला दस करोड़ से ज्यादा का है। इस खुलासे के बाद तब विपक्ष में बैठी बीजेपी ने इस मामले में जांच की मांग की थी।
आपको बता दें कि जयपुर के मेयर पंकज जोशी की शिकायत पर 31 जुलाई 2014 को शहर के अशोक नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी संख्या 256/2014 दर्ज की गई थी। राजस्थान की सत्ता में बीजेपी की वापसी के तुरंत बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें गहलोत, पायलट, रवि कृष्ण और कार्ती चिदंबरम को नामजद आरोपी बनाया गया था।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया, 'आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाड़ा), 468, 471 और 120-बी के तहत लोक सेवकों सहित मुंबई और जयपुर स्थित निजी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। तकनीकी विशिष्टताएं जानबूझकर जोड़कर कंपनी के पक्ष में निविदा जारी करने में हुई कथित अनियमितता को लेकर मामला दर्ज किया गया है।'
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से दर्ज प्राथमिकी में गहलोत, कंपनी के कथित निदेशक पायलट, कार्ती, रवि कृष्ण, ज़िकित्ज़ा हेल्थ केयर, इसके निदेशक श्वेता मंगल, तत्कालीन स्वास्थ्य राज्य मंत्री दुरु मिर्जा और तत्कालीन एनआरएचएम निदेशक को नामजद किया गया था।
हालांकि इस मामले में सचिन पायलट खुद को पाक-साफ बताते हुए कहते हैं कि जांचकर्ताओं ने उन्हें गलत ढंग से कंपनी के निदेशक के तौर पर सूचिबद्ध किया है। पायलट कहते हैं कि उन्होंने ज़िकित्ज़ा के शुरुआति चरण में एक लाभकारी संस्था के तौर पर ग्रामीण इलाकों में मुफ्त एम्बुलेंस सेवा के लिए पैरवी की थी, लेकिन जब यह कंपनी में तब्दील हो गई तो उन्होंने अपना नाता कंपनी से तोड़ लिया। (एजेंसी इनपुट के साथ)
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