
कोलकाता:
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के खिलाफ नगर के एक थाने में दाखिल 'जनरल डायरी' के सिलसिले में अदालत को गुमराह करने के लिए बीजेपी की राज्य इकाई पर आज 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने जुर्माना लगाते हुए पार्टी को निर्देश दिया कि वह पांच लाख रुपये उच्च न्यायालय कानूनी सहायता और शेष राशि पश्चिम बंगाल कानूनी सहायता सेवाओं को दे।
पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ उसके द्वारा दायर एक मामले में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
भाजपा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कोलकाता के जोरासांको थाने ने दायर मामले के बाद जनरल डायरी नंबर नहीं मुहैया कराया था।
पार्टी ने 23 जून को दाखिल मामले में आरोप लगाया था कि अभिषेक ने उत्तरी 24 परगना जिले के बशीरहाट में एक जनसभा में ममता बनर्जी के शासन और तृणमूल कांग्रेस का विरोध करने वालों के खिलाफ 'आपत्तिजनक' भाषा का इस्तेमाल किया था। जनसभा 21 जून को हुई थी।
राज्य भाजपा ने आरोप लगाया था कि थाने के अधिकारियों ने शिकायत पर सिर्फ एक मुहर लगाई थी जिसमें कहा गया था कि ‘‘स्वीकृत-सामग्री सत्यापित नहीं (रिसीव्ड कंटेट्स नोट वेरिफायड)।’’ न्यायमूर्ति दत्ता ने उसके बाद थाने से रिकॉर्ड मंगवाया था जिससे पता लगा कि डायरी संख्या मुहैया कराई गई थी।
नाराज न्यायमूर्ति दत्ता ने अदालत को गुमराह करने के लिए राज्य भाजपा पर यह जुर्माना लगाया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि वरिष्ठ वकीलों से सलाह मशविरा करने के बाद पार्टी आदेश को खंडपीठ में चुनौती देगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि कानून ने अपना काम किया है।’’ सिन्हा ने कहा, ‘‘हालांकि यह एक तकनीकी और मामूली गलती है। हम पर थोपी गई राशि को चुनौती देने के लिए हम वृहद पीठ में अपील करेंगे।’’
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने जुर्माना लगाते हुए पार्टी को निर्देश दिया कि वह पांच लाख रुपये उच्च न्यायालय कानूनी सहायता और शेष राशि पश्चिम बंगाल कानूनी सहायता सेवाओं को दे।
पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ उसके द्वारा दायर एक मामले में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
भाजपा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि कोलकाता के जोरासांको थाने ने दायर मामले के बाद जनरल डायरी नंबर नहीं मुहैया कराया था।
पार्टी ने 23 जून को दाखिल मामले में आरोप लगाया था कि अभिषेक ने उत्तरी 24 परगना जिले के बशीरहाट में एक जनसभा में ममता बनर्जी के शासन और तृणमूल कांग्रेस का विरोध करने वालों के खिलाफ 'आपत्तिजनक' भाषा का इस्तेमाल किया था। जनसभा 21 जून को हुई थी।
राज्य भाजपा ने आरोप लगाया था कि थाने के अधिकारियों ने शिकायत पर सिर्फ एक मुहर लगाई थी जिसमें कहा गया था कि ‘‘स्वीकृत-सामग्री सत्यापित नहीं (रिसीव्ड कंटेट्स नोट वेरिफायड)।’’ न्यायमूर्ति दत्ता ने उसके बाद थाने से रिकॉर्ड मंगवाया था जिससे पता लगा कि डायरी संख्या मुहैया कराई गई थी।
नाराज न्यायमूर्ति दत्ता ने अदालत को गुमराह करने के लिए राज्य भाजपा पर यह जुर्माना लगाया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि वरिष्ठ वकीलों से सलाह मशविरा करने के बाद पार्टी आदेश को खंडपीठ में चुनौती देगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि कानून ने अपना काम किया है।’’ सिन्हा ने कहा, ‘‘हालांकि यह एक तकनीकी और मामूली गलती है। हम पर थोपी गई राशि को चुनौती देने के लिए हम वृहद पीठ में अपील करेंगे।’’
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