नई दिल्ली:
दोषसिद्ध सांसदों विधायकों से संबंधित विवादास्पद अध्यादेश की संभावित वापसी पर फैसला करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की तीन या चार अक्टूबर को बैठक होने की संभावना है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा कड़ा विरोध जताए जाने के बाद इस अध्यादेश का भाग्य लगभग तय नजर आ रहा है।
सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया कि अध्यादेश पर चर्चा के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की तीन या चार अक्टूबर को बैठक होने की संभावना है।
अध्यादेश के संभावित भविष्य के बारे में संकेत उस वक्त मिला जब संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि गांधी ने पार्टी में ढेर सारे लागों की राय को व्यक्त किया है, प्रत्यक्ष रूप से उनका सुझाव था कि सरकार को इस पर दोबारा गौर करना पड़ेगा।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला का कहना था कि पार्टी का काम सरकार को निर्देश देना है। उन्होंने कहा, ‘पिछले छह दशकों के दौरान ऐसे अनेक अवसर रहे हैं जब पार्टी ने सरकार के रुख को बदलवाया है। पार्टी का काम सरकार को निर्देश देना है।’ शुक्ला ने कहा, ‘सरकार को हमेशा पार्टी को स्पष्टीकरण देना होता है क्योंकि पार्टी ही नीतियां निर्धारित करती है और सरकार को निर्देशित करती हैं। इसलिए पार्टी दिशा देने वाली शक्ति है। इसलिए अगर पार्टी की ओर से सुझाव आया है तो उसे सरकार को तवज्जो देना होगा।’
सरकार के सूत्रों ने संकेत दिया कि अध्यादेश पर चर्चा के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की तीन या चार अक्टूबर को बैठक होने की संभावना है।
अध्यादेश के संभावित भविष्य के बारे में संकेत उस वक्त मिला जब संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि गांधी ने पार्टी में ढेर सारे लागों की राय को व्यक्त किया है, प्रत्यक्ष रूप से उनका सुझाव था कि सरकार को इस पर दोबारा गौर करना पड़ेगा।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला का कहना था कि पार्टी का काम सरकार को निर्देश देना है। उन्होंने कहा, ‘पिछले छह दशकों के दौरान ऐसे अनेक अवसर रहे हैं जब पार्टी ने सरकार के रुख को बदलवाया है। पार्टी का काम सरकार को निर्देश देना है।’ शुक्ला ने कहा, ‘सरकार को हमेशा पार्टी को स्पष्टीकरण देना होता है क्योंकि पार्टी ही नीतियां निर्धारित करती है और सरकार को निर्देशित करती हैं। इसलिए पार्टी दिशा देने वाली शक्ति है। इसलिए अगर पार्टी की ओर से सुझाव आया है तो उसे सरकार को तवज्जो देना होगा।’
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