Bulli Bai केस : 2 छात्र और 19 साल की लड़की समेत 3 अरेस्ट, मुख्य आरोपी श्वेता सिंह थी कंट्रोलरों में शामिल

Bulli Bai App Case: बुली बाई केस में 21 साल के मयंक रावल को बुधवार तड़के गिरफ्तार किया गया. साइबर सेल ने इसके पहले उत्तराखंड से ही कथित रूप से मामले की मुख्य आरोपी 19 साल की श्वेता सिंह को और बेंगलुरु से 21 साल के इंजीनियरिंग छात्र विशाल कुमार झा को गिरफ्तार किया था.

नई दिल्ली:

'Bulli Bai' ऐप केस में उत्तराखंड से एक और गिरफ्तारी हुई है. एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि मुंबई की साइबर पुलिस ने एक और छात्र को गिरफ्तार किया है. उनके मुताबिक, 21 साल के मयंक रावल को बुधवार तड़के गिरफ्तार किया गया. साइबर सेल ने इसके पहले उत्तराखंड से ही कथित रूप से मामले की मुख्य आरोपी 19 साल की श्वेता सिंह को और बेंगलुरु से 21 साल के इंजीनियरिंग छात्र विशाल कुमार झा को गिरफ्तार किया था.

मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस केस पर टिप्पणियां कीं. उन्होंने बताया कि इस केस में 2 जनवरी को मामला दर्ज हुआ. 31 दिसंबर को यह ऐप डेवलप किया गया था. उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी पर बताया कि 'टेक्निकल जांच कर बुल्ली बाई ऐप के फॉलोअर तक पहुंचे. बंगलुरु से विशाल कुमार को पकड़ा गया. इसके 5 ही फॉलोअर हैं. जिसके नाम से अकॉउंट था हम वहां तक पहुंचे. अभी तक 3 गिरफ्तार हैं. विशाल झा मुंबई पुलिस की हिरासत में है. श्वेता सिंह को उत्तराखंड से ट्रांजिट रिमांड पर लाया जा रहा है. तीसरा भी उत्तराखंड से पकड़ा गया है. उसका नाम मयंक रावत है. पुलिस इसके तह तक जायेगी.'

उन्होंने कहा कि 'कुल 5 ट्विटर हैंडल इसके फॉलोअर हैं, जिनके हैंडल खालसा से जुड़ा दिखाने की कोशिश की गई थी. हम पता करेंगे कि इसके पीछे उनका मकसद क्या था?'

आरोपी श्वेता सिंह बुल्ली ऐप के कंट्रोलरों में से एक है. श्वेता ऐसे ही तीन ऐप के अकॉउंट को कंट्रोल कर रही थी. जानकारी है कि पूछताछ में उसने बताया है कि उसके अलावा एक और व्यक्ति है जो कंट्रोलर है. पहले आरोपी बॉट्स के जरिये कंटेंट पोस्ट करते थे, बाद में ओरिजनल अकॉउंट से पोस्ट करने लगे. Bulli Bai ऐप से जुड़े केस के सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. अभी तक कुल 3 की गिरफ्तारी दिखाई गई है.

मुंबई पुलिस के पास शिकायत दी गई थी कि ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर प्लेटफॉम GitHub पर होस्ट किए जा रहे `Bulli Bai' ऐप पर सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं की डॉक्टर्ड तस्वीरें डाली गई हैं और उन्हें 'नीलामी' के लिए रखा गया है. हालांकि, असल में ऐसी किसी नीलामी की जानकारी नहीं है, लेकिन इस पूरी मुहिम का उद्देश्य उन महिलाओं को नीचा दिखाने और धमकाने जैसा प्रतीत हो रहा है.

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मुंबई साइबर पुलिस ने मामले में ऐप के अज्ञात डेवलपरों और जिन ट्विटर हैंडलों से इन्हें प्रमोट किया गया था, उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया है.