
कांस्टेबल तेजबहादुर यादव.
नई दिल्ली:
बीएसएफ के कांस्टेबल तेजबहादुर यादव का वीडियो वायरल हुआ तो सबसे ज्यादा हलचल दिल्ली की रायसीना हिल्स में मची. वीडियो में तेजबहादुर ने बताया कि खानपान की क्या हालत है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वीडियो में कितनी सच्चाई है, इसकी जांच करने आदेश दे दिए. बीएसएफ ने भी तत्परता से गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है.
तेजबहादुर का वीडियो 26 लाख लोगों ने देखा और डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने इसे शेयर किया. देश की सुरक्षा करने वालों के साथ हो रहे सलूक को लेकर सब हैरान रह गए.
बीएसएफ ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया है कि मामले की जांच आईजी स्तर के अधिकारी करेंगे. जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तेजबहादुर को दूसरी यूनिट में भेज दिया गया है. मेस कमांडर को छुट्टी पर भेज दिया गया है. यह भी कहा गया है कि तेज बहादुर का सर्विस रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है.
बीएसएफ के मुताबिक तेजबहादुर पर चार साल पहले कोर्ट मार्शल भी चला था. उस पर एक सीनियर पर हमला करने का आरोप था. जम्मू रेंज के आईजी बीएसएफ डीके उपाध्याय ने कहा कि "मैं हैरान हूं कि उसने यह वीडियो अपलोड कैसे किया. वैसे उसका ट्रैक रिकार्ड अच्छा नहीं है. उसके परिवार के हालत देखते हुए पहले भी कर्रवाई नहीं की गई थी."
उधर इस दुस्साहस की पहली कीमत तेजबहादुर को तबादले के तौर पर चुकानी पड़ी. उन्हें नियंत्रण रेखा से पुंछ के बटालियन मुख्यालय में भेज दिया गया. इस बीच सभी अर्धसैनिक बलों के मेस कमांडरों की बैठक हो रही है. जवान बताते हैं कि उन्हें खाने के लिए महीने में 2900 रुपये, यानी रोज 95 रुपये मिलते हैं.
लेकिन तेज बहादुर के मामले ने इस बात की तरफ ध्यान खींचा तो है ही कि सेना और सुरक्षा बलों की बंद दुनिया को कुछ पारदर्शी करने की जरूरत है. वैसे यहां मामला सिर्फ एक जवान का नहीं है, उन तमाम लोगों का हौसला और भरोसा बनाए रखने का है जो देश की सुरक्षा के लिए बहुत विषम हालात में काम कर रहे हैं. यह जरूरी है कि इस वीडियो में अगर कोई सच्चाई है तो कार्रवाई हो और हालात सुधारे जाएं.
तेजबहादुर का वीडियो 26 लाख लोगों ने देखा और डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने इसे शेयर किया. देश की सुरक्षा करने वालों के साथ हो रहे सलूक को लेकर सब हैरान रह गए.
बीएसएफ ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया है कि मामले की जांच आईजी स्तर के अधिकारी करेंगे. जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तेजबहादुर को दूसरी यूनिट में भेज दिया गया है. मेस कमांडर को छुट्टी पर भेज दिया गया है. यह भी कहा गया है कि तेज बहादुर का सर्विस रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है.
बीएसएफ के मुताबिक तेजबहादुर पर चार साल पहले कोर्ट मार्शल भी चला था. उस पर एक सीनियर पर हमला करने का आरोप था. जम्मू रेंज के आईजी बीएसएफ डीके उपाध्याय ने कहा कि "मैं हैरान हूं कि उसने यह वीडियो अपलोड कैसे किया. वैसे उसका ट्रैक रिकार्ड अच्छा नहीं है. उसके परिवार के हालत देखते हुए पहले भी कर्रवाई नहीं की गई थी."
उधर इस दुस्साहस की पहली कीमत तेजबहादुर को तबादले के तौर पर चुकानी पड़ी. उन्हें नियंत्रण रेखा से पुंछ के बटालियन मुख्यालय में भेज दिया गया. इस बीच सभी अर्धसैनिक बलों के मेस कमांडरों की बैठक हो रही है. जवान बताते हैं कि उन्हें खाने के लिए महीने में 2900 रुपये, यानी रोज 95 रुपये मिलते हैं.
लेकिन तेज बहादुर के मामले ने इस बात की तरफ ध्यान खींचा तो है ही कि सेना और सुरक्षा बलों की बंद दुनिया को कुछ पारदर्शी करने की जरूरत है. वैसे यहां मामला सिर्फ एक जवान का नहीं है, उन तमाम लोगों का हौसला और भरोसा बनाए रखने का है जो देश की सुरक्षा के लिए बहुत विषम हालात में काम कर रहे हैं. यह जरूरी है कि इस वीडियो में अगर कोई सच्चाई है तो कार्रवाई हो और हालात सुधारे जाएं.
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