Bihar: 'जब पेड़, पशुओं की गिनती संभव तो पिछड़ी जाति की गणना क्यों नहीं?' नीतीश से मिलकर बोले तेजस्वी यादव

जाति आधारित जनगणना कराने की मांग पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है और राज्य के खर्चे पर ऐसी जनगणना कराने की मांग की है.

Bihar: 'जब पेड़, पशुओं की गिनती संभव तो पिछड़ी जाति की गणना क्यों नहीं?' नीतीश से मिलकर बोले तेजस्वी यादव

RJD नेता तेजस्वी यादव ने जाति आधारित जनगणना की मांग पर आज नीतीश कुमार से अहम मुलाकात की है.

पटना:

बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने आज राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से एक अहम मुलाकात की है. मुलाकात के बाद तेजस्वी ने बताया कि इस मीटिंग में राज्य में पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति की जनगणना कराने पर बात हुई है. नेता विपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी इस पर सैद्धांतिक सहमति जताई है.

तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने सीएम नीतीश के सामने कर्नाटक का मुद्दा उठाया है कि राज्य सरकार चाहे तो केंद्र सरकार के इनकार के बावजूद अपने खर्चे से राज्य में ऐसी जनगणना करवा सकती है. कर्नाटक पहले ही ऐसा प्रस्ताव पास कर चुका है. तेजस्वी ने बताया कि उनके इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कर्नाटक सरकार से विस्तृत जानकारी मंगवाने की बात कही है.

तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने डबल इंजन की सरकार में प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का भी अनुरोध मुख्यमंत्री से किया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. तेजस्वी ने बताया कि सीएम आज (शुक्रवार) दिल्ली जा रहे हैं. वहां से लौटने के बाद वो तीन अगस्त को इस बावत एक चिट्ठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखेंगे. बता दें कि केंद्र जातीय जनगणना की मांग पहले ही ठुकरा चुका है. तेजस्वी के मुताबिक राज्य में सभी विपक्षी दल जाति आधारित जनगणना का समर्थन करते हैं.

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इसी बावत तेजस्वी ने सीएम से मुलाकात के लिए वक्त मांगा था. नीतीश भी पहले जातीय जनगणना की वकालत कर चुके हैं. तेजस्वी ने सीएम से अनुरोध किया कि वो पीएम से मिलने का वक्त भी मांगे, ताकि बिहार की सभी राजनीतिक पार्टियों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे इस मुद्दे पर मिल सके और अपनी बात  रख सके. तेजस्वी ने कहा कि जब देश में पेड़ों, पशुओं, एससी, एसटी और धार्मिक अल्पसंख्यकों की गिनती हो सकती है तो पिछड़ी और अति पिछ़ड़ी जाति की जनगणना कराने में क्या हर्ज है?

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