पटना:
जेडीयू और बीजेपी के बीच रिश्ते में अब महज औपचारिकताएं ही बची हुई हैं और वहां राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। सूत्रों के मुताबिक आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी तथा बीजेपी कोटे से मंत्री नंदकिशोर यादव को फोन कर मुलाकात के लिए बुलाया था, लेकिन इन दोनों ने मिलने से इनकार कर दिया।
इन नेताओं ने कहा है कि उन्हें दिल्ली यानी बीजेपी के आलाकमान से इस बारे में कोई निर्देश नहीं मिला है और यह उनका निजी फैसला है। साथ ही इनका कहना है कि जब नीतीश ने गठबंधन तोड़ने का मन बना लिया है, तो उनसे अब मिलने का क्या मतलब है।
नंदकिशोर यादव ने कहा, नीतीश कुमार ने बैठक के लिए बुलाया था... नीतीश ने पीएम के नाम पर कुछ शर्तें रखी हैं, लेकिन
इस मुद्दे पर बात करने के लिए हम अधिकृत नहीं हैं और बीजेपी आलाकमान ही इस पर बात करेगा, इसलिए हमने बात करने से इनकार किया। नंदकिशोर यादव ने यह भी कहा कि जो भी गठबंधन करेगा, उसे बिहार की जनता का कोपभाजन बनना पड़ेगा।
नरेंद्र मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने के बाद बीजेपी और जेडीयू का अलग होना तय है और सूत्रों के मुताबिक नीतीश की पार्टी की तरफ से रविवार को इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि कि वह अपने विधायक दल के सामने यह बताएंगे कि बीजेपी से उनका मतभेद किस बात पर है। वहीं, जेडीयू नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि अब बीजेपी के साथ गठबंधन का मुद्दा साफ हो चुका है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने इस मामले में अपना रुख शुक्रवार को ही साफ कर दिया, जिस पर आज या कल तक अंतिम फैसला हो जाएगा।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नीतीश कुमार ने पटना स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को जेडीयू कोर ग्रुप के साथ बैठक की। नीतीश ने गठबंधन पर फैसला करने के लिए आज जेडीयू के सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में शरद यादव भी मौजूद रहेंगे।
शुक्रवार को कटिहार जिला में अपनी सेवा यात्रा पूरी कर पटना लौटे नीतीश से यह पूछे जाने पर कि बीजेपी के साथ 17 साल पुरानी उनकी दोस्ती क्या अब टूटने वाली है, उन्होंने कहा, अब जो हालात हैं, वे कठिन हैं और इस कठिन हालात में क्या करना है, यह फैसला करना है। नीतीश ने वर्तमान परिस्थिति को एक शेर की शक्ल में बयान करते हुए कहा, दुआ करते हैं जीने की, दवा करते हैं मरने की, दुशवारी का सबब यही है।
बीजेपी की अब कोशिश यह है कि गठबंधन टूटने के हालात में भी उसके जेडीयू से संबंध बने रहें। यही वजह है कि बीजेपी लगातार गठबंधन टूटने में अपनी भूमिका से बच रही है। जेडीयू के नेताओं के कड़े बयानों के बावजूद बीजेपी नेता बिहार के जनादेश का सम्मान करने की बात कर रहे हैं। शुक्रवार को जब नीतीश कुमार से यह पूछा गया कि क्या अब बीजेपी-जेडीयू का 17 साल पुराना गठबंधन टूट जाएगा. तो उन्होंने कहा कि हालात बहुत खराब हैं और इन हालातों में क्या करना चाहिए, ये सब मिलकर बैठक में तय करेंगे।
इन नेताओं ने कहा है कि उन्हें दिल्ली यानी बीजेपी के आलाकमान से इस बारे में कोई निर्देश नहीं मिला है और यह उनका निजी फैसला है। साथ ही इनका कहना है कि जब नीतीश ने गठबंधन तोड़ने का मन बना लिया है, तो उनसे अब मिलने का क्या मतलब है।
नंदकिशोर यादव ने कहा, नीतीश कुमार ने बैठक के लिए बुलाया था... नीतीश ने पीएम के नाम पर कुछ शर्तें रखी हैं, लेकिन
इस मुद्दे पर बात करने के लिए हम अधिकृत नहीं हैं और बीजेपी आलाकमान ही इस पर बात करेगा, इसलिए हमने बात करने से इनकार किया। नंदकिशोर यादव ने यह भी कहा कि जो भी गठबंधन करेगा, उसे बिहार की जनता का कोपभाजन बनना पड़ेगा।
नरेंद्र मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने के बाद बीजेपी और जेडीयू का अलग होना तय है और सूत्रों के मुताबिक नीतीश की पार्टी की तरफ से रविवार को इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि कि वह अपने विधायक दल के सामने यह बताएंगे कि बीजेपी से उनका मतभेद किस बात पर है। वहीं, जेडीयू नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि अब बीजेपी के साथ गठबंधन का मुद्दा साफ हो चुका है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने इस मामले में अपना रुख शुक्रवार को ही साफ कर दिया, जिस पर आज या कल तक अंतिम फैसला हो जाएगा।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नीतीश कुमार ने पटना स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को जेडीयू कोर ग्रुप के साथ बैठक की। नीतीश ने गठबंधन पर फैसला करने के लिए आज जेडीयू के सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में शरद यादव भी मौजूद रहेंगे।
शुक्रवार को कटिहार जिला में अपनी सेवा यात्रा पूरी कर पटना लौटे नीतीश से यह पूछे जाने पर कि बीजेपी के साथ 17 साल पुरानी उनकी दोस्ती क्या अब टूटने वाली है, उन्होंने कहा, अब जो हालात हैं, वे कठिन हैं और इस कठिन हालात में क्या करना है, यह फैसला करना है। नीतीश ने वर्तमान परिस्थिति को एक शेर की शक्ल में बयान करते हुए कहा, दुआ करते हैं जीने की, दवा करते हैं मरने की, दुशवारी का सबब यही है।
बीजेपी की अब कोशिश यह है कि गठबंधन टूटने के हालात में भी उसके जेडीयू से संबंध बने रहें। यही वजह है कि बीजेपी लगातार गठबंधन टूटने में अपनी भूमिका से बच रही है। जेडीयू के नेताओं के कड़े बयानों के बावजूद बीजेपी नेता बिहार के जनादेश का सम्मान करने की बात कर रहे हैं। शुक्रवार को जब नीतीश कुमार से यह पूछा गया कि क्या अब बीजेपी-जेडीयू का 17 साल पुराना गठबंधन टूट जाएगा. तो उन्होंने कहा कि हालात बहुत खराब हैं और इन हालातों में क्या करना चाहिए, ये सब मिलकर बैठक में तय करेंगे।
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