गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी पर बयान के बीच एआर रहमान के ट्वीट से छिड़ी बहस

अमित शाह ने सात अप्रैल को कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं की बजाय अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा था कि इससे देश की अखंडता को खतरा है.

गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी पर बयान के बीच एआर रहमान के ट्वीट से छिड़ी बहस

अमित शाह ने सात अप्रैल को कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं की बजाय अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए

चेन्नई:

तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने शनिवार को कहा कि लोग अपनी मर्जी से हिंदी सीख सकते हैं लेकिन हिंदी को थोपा जाना अस्वीकार्य है. इस बीच ऑस्कर पुरस्कार विजेता ए.आर. रहमान द्वारा तमिल भाषा को लेकर डाली गई एक तस्वीर के चलते सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया है.

दिवंगत द्रविड़ नेता सी. एन. अन्नादुरै का हवाला देते हुए अन्नाद्रमुक के शीर्ष नेता ओ. पन्नीरसेल्वम ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ेगी तो जो लोग हिंदी सीखना चाहते हैं वे अपनी इच्छा से ऐसा करेंगे लेकिन लोगों पर हिंदी थोपना कभी भी स्वीकार नहीं नहीं किया जाएगा.

पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया कि उनकी पार्टी ने तमिल और अंग्रेजी की दो भाषाओं की नीति अन्नादुरै की विधारधारा के अनुरूप है. इस बीच ट्विटर पर कई उपयोगकर्ताओं ने रहमान की पोस्ट को हिंदी पर दिए गए अमित शाह के बयान और उससे उपजी प्रतिक्रिया से जोड़ा.

अमित शाह ने सात अप्रैल को कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं की बजाय अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा था कि इससे देश की अखंडता को खतरा है. रहमान ने एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा ‘तमिषानंगु' जो तमिल भाषा को समर्पित गीत को इंगित करता है.

तस्वीर के नीचे लिखी गई पंक्ति तमिल राष्ट्रवादी कवि भारतीदासन की एक कविता की है और इसका अर्थ है कि तमिल भाषा तमिल लोगों के अधिकार का मूल है. रहमान द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में लाल पृष्ठभूमि में सफेद साड़ी पहने एक महिला को दिखाया गया है जो तमिल भाषी लोगों की भावनाओं और हिंदी थोपने के संदर्भ में प्रतीत होती है.

सोशल मीडिया के एक वर्ग ने रहमान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने लाल पृष्ठभूमि में तस्वीर पोस्ट कर हिंदी का विरोध और तमिल को पूर्ण समर्थन दिया है, वहीं अन्य लोगों ने तस्वीर पोस्ट करने के उनके इरादे पर सवाल उठाया. ट्विटर पर एक उपयोगकर्ता ने कहा कि संगीत निर्देशक ने हिंदी फिल्मों में काम कर के पैसा और लोकप्रियता हासिल की और अब वह हिंदी को निशाना बना रहे हैं.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)