मुंबई:
आदर्श आवास सोसायटी घोटाला में कथित तौर पर शामिल होने के आरोपों के चलते अपना पद छोड़ने को मजबूर हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण ने इस घोटाले के लिए अपने पूर्ववर्ती और केन्द्रीय मंत्री विलासराव देशमुख को सोमवार को दोषी ठहराया है। प्रदेश में 1999-2003 तक राजस्व मंत्री रहे अशोक चह्वाण ने इस मामले की जांच कर रहे दो सदस्यीय न्यायिक आयोग के समक्ष दिए हलफनामे में इस मामले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि इस भूखंड को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मंजूर किया था। सोसाइटी पर उठे विवाद के बाद पिछले साल मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले चह्वाण ने विलासराव देशमुख का नाम लिए बिना आयोग के सामने कहा कि पुणे, मुंबई और उपनगरों में स्थित भूखंडों और 25 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत वाले भूखंडों का आवंटन नियमानुसार मुख्यमंत्री को करना होता है। उधर, इस बारे में आयोग के सामने शुक्रवार को हलफनामा दाखिल करने वाले केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री देशमुख ने पूरे मामले की जिम्मेदारी राजस्व विभाग और मुंबई के जिलाधीश पर डाल दी थी । उन्होंने अपने तहत काम करने वाले तत्कालीन राजस्व मंत्री चह्वाण का नाम लिये बिना कहा था, भूखंड का आवंटन राजस्व विभाग का काम है। कलेक्टर का कार्यालय आमतौर पर भूखंड के आवंटन के लिए प्रस्ताव तैयार करने के काम से नजदीकी से जुड़ा होता है।
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