Cancer Causing Food: आज के समय में लोगों की लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि वो अपने करियर और अच्छी लाइफ पाने के लिए इतने बिजी रहते हैं तो खुद की सेहत को वो इग्नोर कर देते हैं. जिसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है खानपान पर. खाना बनाने का समय ना होना या फिर ज्यादा समय ना निकालना पड़े इस वजह से लोग कंफी फूड्स की मदद लेते हैं. ऐसे में उनकी थाली में फ्रेश और हेल्दी खाने की जगह ले ली है अल्ट्रा प्रोसेस्ड और रेडी टू ईट फूड्स ने. जिनको आपको बस गरम करना है और खाना बनकर तैयार हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी ये आदत आपके लिए जहर का काम कर रही है. अलट्रा प्रोसेस्ड फूड को तैयार करने में उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं और उसमें केमिकल की अधिकता ज्यादा हो जाती है.
एक रिसर्च में ये बात साबित हुई है कि जो लोग ज्यादा अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, उनके शरीर में सूजन ज्यादा पाई जाती है. इसके साथ ही उनमें हृदय रोग, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
क्या हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड वो खाना होता है जिसको लंबे समय तक के लिए सेफ रखा जाता है और उसको खराब होने से बचाने और खाने योग्य बनाने के लिए कई तरह के केमिकल्स पदार्थों, रंगों और एडिटिव्स से मिलाकर तैयार किया जाता है. इसमें सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेट वाले स्नैक्स, बर्गर, सॉसेज, बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड जूस, प्रोसेस्ड मीट जैसे फूड आइटम्स शामिल हैं.
आपको बता दें कि इन फूड आइटम्स में पोषक तत्व लगभग ना के बराबर होते हैं. बल्कि इसमें नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है. अमेरिका में किए गए एक सर्वे के अनुसार, वयस्कों के खाने में 60 फीसदी से ज्यादा और बच्चों के खाने में लगभग 70 फीसदी हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से आता है.
ये भी पढ़ें: पेट में दर्द, मितली के साथ दिखें ये लक्षण, तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास
क्या है रिसर्च?
फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी (एफएयू) के चार्ल्स ई. श्मिट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में की गई एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाते हैं उनके शरीर में ‘हाई-सेंसिटिव सी-रिएक्टिव प्रोटीन' का लेवल काफी ज्यादा बढ़ा जाता है. बता दें कि ये एक संकेत है शरीर में सूजन, हार्ट रोगों और कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रस्त होने का.
ये रिसर्च 9,254 अमेरिकी लोगों पर की गई थी, जिस पर उनके खानपान की आदतों से लेकर उनकी फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ कंडीशन का डीटेल में विश्लेषण किया गया था. रिसर्च्स ने पाया कि जो लोग अपने कुल कैलोरी का 60 से 79 फीसदी हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से लेते हैं, उनमें हाई-सेंसिटिव सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर सबसे ऊंचा था. वहीं इसकी तुलना में जो लोग 0 से 19 फीसदी तक प्रोसेस्ड फूड खाते थे, उनमें सूजन का स्तर काफी कम पाया गया है.
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार कुछ एज ग्रुप के लोगों में ये खतरा और ज्यादा पाया गया जिसमें 50 से 59 साल के लोग शामिल थे, उनमें सूजन का खतरा 26 फीसदी ज्यादा था. वहीं बात करें मोटे लोगों की तो उनमें ये खतरा 80 फीसदी तक बढ़ गया. जो लोग स्मोकिंग करते हैं उसमें ये खतरा 17 फीसदी ज्यादा पाया गया. जबकि जो लोग फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं तो उनमें इसका खतरा ज्यादा पाया गया है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
रिसर्च पेपर में रिसर्चर के हवाले से कहा गया है की इस स्टडी से साफ है कि जो लोग ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, उनमें सूजन का लेवल काफी ज्यादा होता है.
History of Samosa- Swaad Ka Safar | समोसे का इतिहास | जानें ईरान से भारत कैसे पहुंचा समोसा
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं