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मोटापा बनाता है दिमाग को बूढ़ा, शरीर में फैट किस जगह ये तय करता है दिमाग की उम्र, स्टडी ने बताई न्यूरोलॉजिकल खतरे की वजह

Obesity Brain Aging: शोध में सामने आया है कि कुछ खास तरह के फैट डिस्ट्रीब्यूशन जैसे अग्न्याशय (पैंक्रियास) में फैट जमा होना या बाहर से दुबले दिखने वाले लेकिन अंदर से फैट वाले यानी स्किनी फैट लोग दिमाग की उम्र तेजी से बढ़ा सकते हैं.

मोटापा बनाता है दिमाग को बूढ़ा, शरीर में फैट किस जगह ये तय करता है दिमाग की उम्र, स्टडी ने बताई न्यूरोलॉजिकल खतरे की वजह
इस रिसर्च में एमआरआई तकनीक की मदद से शरीर के अलग-अलग अंगों में जमा फैट को मापा गया.

Brain Age Obesity Link: अब तक मोटापे को सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या माना जाता रहा है. आम सोच यही रही है कि जितना ज्यादा मोटापा, उतना ज्यादा शरीर और दिमाग पर असर. लेकिन, एक नई स्टडी ने इस सोच को बदल दिया है. इस रिसर्च के मुताबिक, मोटापे का असर दिमाग पर सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि शरीर में कितना फैट है, बल्कि इस बात से ज्यादा जुड़ा है कि फैट शरीर के किस हिस्से में जमा है. शोध में सामने आया है कि कुछ खास तरह के फैट डिस्ट्रीब्यूशन जैसे अग्न्याशय (पैंक्रियास) में फैट जमा होना या बाहर से दुबले दिखने वाले लेकिन अंदर से फैट वाले यानी स्किनी फैट लोग दिमाग की उम्र तेजी से बढ़ा सकते हैं. इससे याददाश्त कमजोर होना, सोचने-समझने की क्षमता घटना और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

फैट का पैटर्न क्यों है इतना जरूरी?

इस स्टडी के सह-लेखक और चीन की शुझोउ मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर काई लियू के अनुसार, पहले की रिसर्च में यह देखा गया था कि पेट के अंदर जमा फैट (विसरल फैट) दिमागी सेहत को नुकसान पहुंचाता है. लेकिन, नई स्टडी ने यह साफ किया कि हर तरह का फैट एक जैसा खतरा नहीं होता.

इस रिसर्च में एमआरआई तकनीक की मदद से शरीर के अलग-अलग अंगों में जमा फैट को मापा गया. इससे एक डेटा-बेस्ड वर्गीकरण तैयार किया गया, जो दिखाता है कि कौन सा फैट पैटर्न दिमाग के लिए ज्यादा खतरनाक है. इस प्रक्रिया में दो ऐसे फैट टाइप सामने आए, जिन पर पहले ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था.

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स्टडी में क्या पाया गया?

इस रिसर्च में ब्रिटेन के यूके बायोबैंक के लगभग 26,000 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इसमें मेडिकल इमेजिंग, शारीरिक माप, लाइफस्टाइल, बीमारियों का इतिहास और बायोमार्कर शामिल थे. इन सभी जानकारियों की तुलना दिमाग की सेहत से की गई.

नतीजों में सामने आया कि कुछ खास फैट पैटर्न वाले लोगों में ग्रे मैटर का तेजी से सिकुड़ना, दिमाग की उम्र सामान्य से जल्दी बढ़ना, सोचने और याददाश्त में गिरावट, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ा हुआ खतरा देखा गया. ये खतरे पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाए गए.

पैंक्रियाटिक फैट: अनदेखा लेकिन बड़ा खतरा

जिन लोगों में फैट मुख्य रूप से पैंक्रियास में जमा था, उनमें वहां फैट की मात्रा लगभग 30 प्रतिशत तक पाई गई. यह मात्रा अन्य फैट पैटर्न वालों से दो से तीन गुना ज्यादा थी. दिलचस्प बात यह रही कि इन लोगों में लिवर फैट ज्यादा नहीं था.

प्रोफेसर लियू कहते हैं कि आमतौर पर डॉक्टर फैटी लिवर पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन दिमागी सेहत के लिहाज से पैंक्रियास में जमा फैट कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.

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स्किनी फैट: दुबले दिखने वालों का छुपा खतरा

स्किनी फैट वे लोग होते हैं जो बाहर से ज्यादा मोटे नहीं दिखते, लेकिन उनके शरीर में फैट का अनुपात ज्यादा होता है और मसल्स कम. स्टडी में पाया गया कि इन लोगों में पेट के आसपास फैट ज्यादा जमा होता है, जबकि लिवर और पैंक्रियास में कम.

इनका बीएमआई बहुत ज्यादा नहीं होता, इसलिए ये खुद को सुरक्षित समझ लेते हैं. लेकिन, असल में इनका वजन और मांसपेशियों का अनुपात बिगड़ा हुआ होता है, जो खासकर पुरुषों में दिमागी सेहत के लिए खतरा बन सकता है.

यह स्टडी साफ बताती है कि मोटापे को सिर्फ वजन या बीएमआई से नहीं समझा जा सकता. फैट कहां जमा है, यह दिमाग की सेहत के लिए कहीं ज्यादा मायने रखता है. इसलिए फिट रहने का मतलब सिर्फ पतला दिखना नहीं, बल्कि शरीर में फैट और मसल्स का सही संतुलन बनाए रखना है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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