Obesity Health Impact: दुनिया भर में मोटापा (Obesity) अब सिर्फ डायबिटीज, हार्ट डिजीज या हाई बीपी तक सीमित समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह संक्रामक बीमारियों (Infectious Diseases) से होने वाली मौतों का भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है. मेडिकल जर्नल द लैंसेट (The Lancet) में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने इस खतरे की ओर गंभीर चेतावनी दी है. अध्ययन के मुताबिक, साल 2023 में दुनियाभर में संक्रमण से हुई हर 10 में से 1 मौत का संबंध मोटापे से हो सकता है.
यह शोध इसलिए भी अहम है क्योंकि अब तक मोटापे और संक्रमण के बीच संबंध को लेकर पुख्ता सबूत सीमित थे. कोरोना महामारी के दौरान यह जरूर देखा गया था कि मोटे लोगों में गंभीर बीमारी और मौत का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन यह साफ नहीं था कि क्या यही जोखिम दूसरी संक्रामक बीमारियों में भी लागू होता है. लैंसेट की यह स्टडी इसी खाली जगह को भरने की कोशिश करती है.

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स्टडी में क्या पाया गया?
इस शोध में फिनलैंड और ब्रिटेन के 5 लाख 40 हजार से ज्यादा एडल्ट्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) शुरुआत में दर्ज किया गया और फिर करीब 13-14 साल तक उन्हें फॉलो किया गया. इस दौरान यह देखा गया कि कितने लोगों को संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा या उनकी मौत हुई.
नतीजे चौंकाने वाले रहे. मोटापे से ग्रस्त लोगों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने या मौत का खतरा 70 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. बहुत ज्यादा मोटापे (Severe Obesity) वाले लोगों में यह खतरा तीन गुना तक बढ़ गया.
किन बीमारियों का खतरा बढ़ा?
स्टडी के अनुसार मोटापा कई तरह की संक्रामक बीमारियों को गंभीर बना देता है. इनमें शामिल हैं:
- फ्लू
- कोविड-19
- निमोनिया
- गैस्ट्रोएंटेराइटिस
- यूरिन इन्फेक्शन
- लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन
हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि HIV और टीबी जैसी बीमारियों में मोटापे से गंभीर खतरा बढ़ता हुआ नहीं दिखा.

मोटापा क्या है और इसे कैसे मापा जाता है?
मोटापा एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है. इसे आमतौर पर BMI (बॉडी मास इंडेक्स) से मापा जाता है, जो लंबाई और वजन पर आधारित होता है. जिन लोगों का BMI 30 kg/m² या उससे ज्यादा होता है, उन्हें मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है.
भारत के लिए क्यों है यह स्टडी बेहद जरूरी?
NFHS-5 (2019–21) के मुताबिक, भारत में करीब 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं. ऐसे में यह स्टडी भारत के लिए खास मायने रखती है.
दिल्ली के फोर्टिस C-DOC अस्पताल के चेयरपर्सन डॉ. अनूप मिश्रा के अनुसार, भारतीयों में कम मोटापे पर ही डायबिटीज और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां शुरू हो जाती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. जब मोटापा, डायबिटीज, एयर पॉल्यूशन, भीड़भाड़ और खराब हाइजीन एक साथ मौजूद हों, तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
वैश्विक तस्वीर क्या कहती है?
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डेटा के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि 2023 में दुनियाभर में संक्रमण से हुई 54 लाख मौतों में से करीब 6 लाख मौतें मोटापे से जुड़ी हो सकती हैं. अमेरिका में हर 4 में 1 संक्रमण मौत का संबंध मोटापे से, ब्रिटेन में हर 6 में 1, जबकि वियतनाम जैसे देशों में यह आंकड़ा सिर्फ 1 प्रतिशत के आसपास रहा.
क्या सावधानी जरूरी है?
शोधकर्ताओं ने साफ किया कि यह अध्ययन ऑब्जर्वेशनल डेटा पर बेस्ड है. नतीजे यह संकेत जरूर देते हैं कि बढ़ता मोटापा भविष्य में संक्रमण से होने वाली मौतों और अस्पताल में भर्ती के मामलों को और बढ़ा सकता है.
मोटापा अब सिर्फ लाइफस्टाइल डिजीज नहीं, बल्कि इम्यून सिस्टम को कमजोर कर जानलेवा संक्रमणों का रास्ता भी खोल रहा है. भारत जैसे देशों में जहां संक्रमण का बोझ पहले से ज्यादा है, वहां मोटापे पर काबू पाना एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य जरूरत बन चुका है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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