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मानसून में क्यों बढ़ते हैं फ्लू के मामले? AIIMS के डॉक्टर ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके

मानसून में फ्लू और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. एम्स के डॉक्टर से जानिए फ्लू के शुरुआती लक्षण, किन लोगों को ज्यादा खतरा है, जांच, इलाज और बचाव के तरीके.

मानसून में क्यों बढ़ते हैं फ्लू के मामले? AIIMS के डॉक्टर ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके
Monsoon Flu: मानसून में फ्लू के लक्षण क्या हैं? एम्स एक्सपर्ट से जानें बचाव के उपाय
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Monsoon Flu Cases Increasing: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही वायरल इंफेक्‍शन और फ्लू के मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. दिल्ली स्थित एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर संजीव सिन्हा का कहना है कि इन दिनों अस्पतालों में खांसी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द जैसी शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि फ्लू के शुरुआती लक्षण क्या हैं, किन लोगों को ज्यादा खतरा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.

मानसून में फ्लू के मामले क्यों बढ़ जाते हैं?

डॉक्‍टर संजीव सिन्हा के कहते हैं कि मानसून के दौरान मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलता है. कभी तेज बारिश होती है तो कभी एकदम से गर्मी बढ़ जाती है. तापमान और नमी में होने वाले ये उतार-चढ़ाव वायरस के फैलने के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं. इसलिए ही जुलाई और अगस्त के महीनों में फ्लू और दूसरे वायरल इंफेक्‍शन के मामले ज्‍यादा देखने को म‍म‍िलते हैं.

फ्लू के आम लक्षण क्या हैं?

फ्लू या इन्फ्लूएंजा के लक्षण सामान्य वायरल इंफेक्‍शन जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके प्रमुख लक्षण हैं:

  • गले में खराश
  • नाक बहना
  • सूखी खांसी
  • तेज बुखार
  • सिरदर्द
  • पूरे शरीर में दर्द
  • बहुत ज्‍यादा थकान और कमजोरी

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सतर्क होना जरूरी है.

किन लोगों में गंभीर इंफेक्‍शन का खतरा ज्यादा होता है?

कुछ लोगों में फ्लू का इंफेक्‍शन ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है. इनमें शामिल हैं:

  • 65 वर्ष से ज्‍यादा उम्र के बुजुर्ग
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे
  • गर्भवती महिलाएं
  • मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • हृदय रोगी
  • किडनी से जुड़ी बीमारी वाले लोग
  • कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज

इन लोगों की इम्‍यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा रहता है.

फ्लू का पता कैसे लगाया जाता है?

डॉ. सिन्हा बताते हैं कि शुरुआत में मरीज के लक्षणों के आधार पर क्लिनिकल डायग्नोसिस किया जाता है. अगर डॉक्टर को इन्फ्लूएंजा का शक होता है, तो नाक या गले से सैंपल लेकर RT-PCR जांच कराई जाती है.

इस जांच से पता चलता है कि मरीज को इन्फ्लूएंजा है या नहीं और अगर है तो कौन-सा स्ट्रेन, जैसे H1N1 या H3N2, इंफेक्‍शन का कारण है.

फ्लू होने पर क्या करना चाहिए?

अगर जांच में फ्लू की पुष्टि हो जाती है, तो डॉक्टर मरीज को एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं. इसके अलावा:

  • आराम करें
  • खूब पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं
  • बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल लें
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें

हाइड्रेटेड रहना रिकवरी के लिए बेहद जरूरी माना जाता है.

फ्लू फैलने से कैसे रोकें?

इन्फ्लूएंजा एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों के जरिए वायरस दूसरों तक पहुंच सकता है.

बचाव के लिए:

  • कम से कम 2 से 3 दिन घर में आइसोलेट रहें
  • मास्क पहनें
  • भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें
  • हाथों की सफाई का ध्यान रखें

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें:

  • कई दिनों तक बना रहने वाला तेज बुखार
  • सांस लेने में परेशानी
  • ऑक्सीजन का स्तर कम होना
  • बहुत ज्‍यादा कमजोरी
  • भ्रम होना

समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.

फ्लू को हल्के में लेना क्यों खतरनाक हो सकता है?

डॉक्टरों के अनुसार, इलाज में देरी करने पर इंफेक्‍शन गंभीर रूप ले सकता है. खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में वायरस फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया का कारण बन सकता है. इससे ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ सकती है.

एक्सपर्ट की सलाह

मानसून में फ्लू और वायरल इंफेक्‍शन से बचने के लिए लक्षणों को नजरअंदाज न करें. अगर बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसे लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत पड़ने पर जांच जरूर कराएं. समय पर इलाज गंभीर समस्याओं से बचा सकता है.

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