क्या कभी आपने सोचा है कि अगर बुढ़ापे को रोक दिया जाए तो इंसान कितने साल तक जी सकता है? कई लोग मानते हैं कि भविष्य में विज्ञान 200 साल तक जीना संभव बना सकता है. लेकिन एक नई स्टडी ने इस दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, शरीर में होने वाले कुछ ऐसे प्राकृतिक बदलाव हैं जो इंसान की उम्र की एक सीमा तय कर सकते हैं.
एनपीजे एजिंगट्रस्टेड सोर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में एक गणितीय मॉडल का उपयोग करके यह अनुमान लगाया गया है कि यदि उम्र बढ़ने के लगभग हर प्रतिवर्ती लक्षण को समाप्त कर दिया जाए, और केवल दैहिक उत्परिवर्तनट्रस्टेड सोर्स - डीएनए परिवर्तन जो जीवन भर स्वाभाविक रूप से जमा होते हैं - को ही छोड़ दिया जाए, तो मनुष्य कितने समय तक जीवित रह सकते हैं.
क्या हम इंसान 200 साल तक जी सकते हैं... यह सवाल लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है. एक नई रिसर्च के में यह बात सामने आई है कि भले ही भविष्य में एंटी एजिंग (Anti Aging) तकनीक और लोंजेविटी (Longevity) से जुड़ी खोजें आगे बढ़ जाएं, फिर भी मानव शरीर की कुछ जैविक सीमाएं बनी रह सकती हैं.
दुनिया का सबसे ज्यादा जीने वाला व्यक्ति कौन था?
रिकॉर्ड के अनुसार फ्रांस की जीन कैलमेंट 122 वर्ष तक जीवित रहीं। आज भी यह मानव इतिहास में दर्ज सबसे लंबी उम्र मानी जाती है.
अगर बूढ़ा होने की वजह को ही खत्म कर दिया जाए तो?
यह स्टडी जर्नल एनपीजे एजिंग में प्रकाशित हुई है. इसमें वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि अगर बढ़ती उम्र की लगभग सभी ऐसी वजहों को खत्म कर दिया जाए, जिन्हें बदला जा सकता है, तो इंसान अधिकतम कितने साल तक जी सकता है. इस मॉडल में सिर्फ शरीर की कोशिकाओं में समय के साथ जमा होने वाले डीएनए म्यूटेशन को आधार बनाया गया.
रिसर्च के मुताबिक, सबसे आदर्श स्थिति में भी इंसान की औसत उम्र करीब 146 से 194 साल तक पहुंच सकती है. हालांकि यह सिर्फ एक अनुमान है और इसका मतलब यह नहीं कि आने वाले समय में हर व्यक्ति इतनी उम्र तक जी पाएगा.
क्या इंसान वास्तव में 200 साल तक जी सकता है?
नहीं, वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं और दिल की मांसपेशियों की कोशिकाएं उम्र बढ़ने के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं. इन कोशिकाओं की खास बात यह है कि ये आसानी से दोबारा नहीं बनतीं.
समय के साथ इनमें बदलाव और नुकसान बढ़ता जाता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता घटने लगती है. यही वजह है कि इन्हें इंसान की उम्र सीमित करने वाले सबसे बड़े कारणों में माना गया. वहीं, लीवर जैसे अंग काफी मजबूत साबित हुए, क्योंकि वहां खराब कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएं बनने की क्षमता बनी रहती है.
नई स्टडी में इंसान की अधिकतम उम्र कितनी बताई गई?
वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान की उम्र ज्यादा से ज्यादा 146 से 194 साल के बीच हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि 200 साल तक जीना हर किसी के लिए संभव होगा. यह अध्ययन Human Lifespan, लंबी उम्र का रहस्य, स्वस्थ जीवन और Health Span जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रकाश डालता है, जो केवल ज्यादा साल जीने नहीं बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने पर जोर देते हैं.
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क्या सिर्फ DNA ही उम्र तय करता है?
स्टडी से यह भी साफ हुआ कि सिर्फ DNA में होने वाले बदलाव ही इंसान की उम्र तय नहीं करते. बढ़ती उम्र के पीछे शरीर में होने वाली कई प्रोसेस एक साथ काम करती हैं. इनमें सूजन, कोशिकाओं की ऊर्जा बनाने की क्षमता में कमी और दूसरे जैविक बदलाव भी शामिल हैं. इसलिए सिर्फ एक समस्या का इलाज मिल जाने से बहुत लंबी उम्र की गारंटी नहीं दी जा सकती.
कौन से अंग सबसे पहले बूढ़े होने लगते हैं?
स्टडी में पाया गया कि दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं (नर्व सेल्स) और दिल की मांसपेशियों की कोशिकाएं उम्र बढ़ने के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.
इन कोशिकाओं की खासियत यह है कि ये आसानी से दोबारा नहीं बनतीं, इसलिए समय के साथ इनमें होने वाला नुकसान जमा होता रहता है और शरीर की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है.
हेल्थ स्पैन और लाइफ स्पैन में क्या अंतर है?
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ज्यादा साल जीना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उन सालों में स्वस्थ रहना ज्यादा अहम है.
इसे हेल्थ स्पैन कहा जाता है, यानी जिंदगी का वह हिस्सा जब व्यक्ति बिना बड़ी बीमारी या शारीरिक परेशानी के सामान्य जीवन जी सके.
लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए वैज्ञानिक क्या सलाह देते हैं?
अभी तक ऐसा कोई चमत्कारी सप्लीमेंट, दवा या तरीका नहीं मिला है जो उम्र बढ़ा दे. लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम, अच्छी नींद, संतुलित खानपान, धूम्रपान से दूरी, रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना सबसे ज्यादा असरदार माना जाता है.
इसके अलावा परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा सामाजिक जुड़ाव भी बेहतर सेहत और लंबी स्वस्थ जिंदगी में मददगार हो सकता है.
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