भारत को अपनी पहली डेंगू वैक्सीन मिल गई है. भारत ने टाकेडा की QDENGA को मंजूरी दे दी है, जो उसकी पहली डेंगू वैक्सीन है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की ओर से ताकेदा की QDENGA (TAK-003) को मंजूरी देने के बाद भारत ने डेंगू के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे यह देश की पहली मंजूर डेंगू वैक्सीन बन गई है. यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत उन देशों में शामिल है, जहां दुनिया में सबसे ज्यादा डेंगू के मामले पाए गए हैं.
इस बारे में एनडीटीवी ने और जानकारी लेने के लिए बात की डॉ. चारू दत्त से. वे फरीदाबाद में स्थित एक रिहैबिलिटेशन केयर एक्सपर्ट हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 8 साल का व्यापक अनुभव है. और जानने की कोशिश की कि देश में पिछले दो दशकों में शहरीकरण, क्लाइमेट चेंज, मच्छरों के बदलते ठिकानों और आबादी बढ़ने के कारण इसके मामले तेजी से क्यों बढ़े हैं. आइए जानते है कि यह कैसे काम करती है, इसे कौन ले सकता है, इसका असर, संभावित कीमत, रोलआउट प्लान, और दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक में डेंगू की रोकथाम के लिए इसका क्या मतलब है.
ये वैक्सीन क्यों है अलग?
डॉक्टर चारु दत्त बताते हैं QDENGA एक लाइव-एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसका मतलब है कि इसे सभी चार डेंगू वायरस सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. पुरानी डेंगू वैक्सीन डेंगवैक्सिया के उलट, QDENGA के लिए लोगों को यह पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती कि उन्हें पहले डेंगू हुआ है या नहीं, जो बड़े पैमाने पर पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के लिए एक बड़ा फायदा है.
इन देशों में पहले से दी जाती है ये वैक्सीन
इस वैक्सीन को यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना समेत 40 से ज्यादा देशों में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. भारत अब उस लिस्ट में शामिल हो गया है, ऐसे समय में जब डेंगू देश के सबसे बड़े सीजनल पब्लिक हेल्थ खतरों में से एक बनकर उभर रहा है.
QDENGA क्या है?
डॉक्टर चारु दत्त बताते हैं QDENGA (TAK-003) एक लाइव, एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है जिसे जापानी फार्मास्यूटिकल कंपनी टाकेडा ने बनाया है. इसे डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे सिम्प्टोमैटिक डेंगू और गंभीर बीमारी का खतरा कम हो जाता है, जिसके लिए हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है.
Also Read: डेंगू में प्लेटलेट्स कितने गिरने पर बढ़ता है खतरा? डॉक्टर ने बताईं 3 बड़ी गलतियां

Dr. Charu Dutt Arora - Geriatrics & Palliative Care Specialist
कितनी होगी डोज?
यह वैक्सीन तीन महीने के गैप पर दो डोज में दी जाती है. इसे सबक्यूटेनियस इंजेक्शन से दिया जाता है. WHO ने डेंगू कंट्रोल की बड़ी स्ट्रैटेजी के तहत उन देशों में इसके इस्तेमाल की सलाह दी है जहां डेंगू फैलने का खतरा ज्यादा है.
भारत के लिए यह मंजूरी क्यों जरूरी है?
रॉयटर्स के मुताबिक, दुनिया भर में डेंगू के कुल मामलों में से लगभग एक-तिहाई भारत में हैं, और पिछले दो दशकों में डेंगू के रिपोर्ट किए गए मामलों में 11 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. मौसमी बीमारियों के फैलने से अस्पतालों पर बहुत ज्यादा दबाव बना रहता है, खासकर मानसून और मानसून के बाद के महीनों में.
वैक्सीन किसे मिल सकती है?
डॉक्टर चारु दत्त बताते हैं भारत में मंजूर की गई सही दवा की जानकारी CDSCO और Takeda लॉन्च के समय देंगे. इंटरनेशनल लेवल पर, QDENGA को बच्चों और बड़ों दोनों के लिए के लिए मंजूरी मिली है.
QDENGA कितना असरदार है?
TIDES फेज III ट्रायल के नतीजों से उत्साहजनक और लंबे समय तक चलने वाले परिणाम मिले. इस ट्रायल में डेंगू से ज्यादा प्रभावित आठ देशों के 20,000 से ज्यादा बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया था. 4.5 साल तक नजर रखने (फॉलो-अप) के बाद, वैक्सीन ने ये नतीजे दिखाए:
डेंगू की वजह से अस्पताल में भर्ती होने से 84% सुरक्षा
कुल मिलाकर, वायरस से पुष्टि हुए डेंगू से लगभग 61% सुरक्षा
जिन लोगों को पहले डेंगू हुआ था और जिन्हें नहीं हुआ था, दोनों में गंभीर डेंगू से लंबे समय तक सुरक्षा (हालांकि डेंगू के अलग-अलग सीरोटाइप के हिसाब से असर अलग-अलग था). इन नतीजों के आधार पर WHO ने इसे इस्तेमाल करने की सलाह दी और कई अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी संस्थाओं ने इसे मंजूरी दी.
भारत में QDENGA की कीमत क्या होगी?
भारत में इसकी आधिकारिक कीमत अभी घोषित नहीं की गई है. हालांकि, कई बातें इसकी कीमत पर असर डाल सकती हैं:
Takeda ने भारत में हर साल 5 करोड़ डोज बनाने के लिए हैदराबाद की कंपनी Biological E के साथ मैन्युफैक्चरिंग पार्टनरशिप की है, जिससे समय के साथ कीमत कम हो सकती है.
स्थानीय स्तर पर बनाने से सप्लाई बेहतर हो सकती है और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है.
डॉक्टर चारु दत्त बताते हैं कीमत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वैक्सीन को शुरू में सिर्फ प्राइवेट मार्केट में लाया जाता है या बाद में सरकारी टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है.
क्या सभी को वैक्सीन की जरूरत होगी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह है कि डेंगू का टीकाकरण एक ऐसी मिली-जुली रणनीति के हिस्से के तौर पर शुरू किया जाना चाहिए जिसमें ये चीज़ें शामिल हों:
- मच्छरों पर नियंत्रण
- समुदाय में जागरूकता
- जल्दी पहचान
- हेल्थकेयर तक पहुंच
- निगरानी
टीकाकरण, मच्छरों के काटने से बचने या मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने का विकल्प नहीं है.
क्या वैक्सीन डेंगू को खत्म कर सकती है?
नहीं. बहुत असरदार वैक्सीन भी डेंगू को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकतीं क्योंकि:
वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप एक साथ फैलते हैं. मच्छरों की आबादी संक्रमण फैलाती रहती है.
जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहे शहरीकरण की वजह से मच्छरों के रहने की जगहें बढ़ रही हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि टीकाकरण को मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की जगह नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करने वाला होना चाहिए.
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
डॉक्टर चारु दत्त बताते हैं यह मंजूरी भारत में डेंगू से निपटने की कोशिशों में एक अहम पड़ाव है. अगर इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो QDENGA से गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने के मामलों और मौसमी प्रकोप के दौरान हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है.
Biological E के साथ पार्टनरशिप भारत को ग्लोबल डेंगू वैक्सीन सप्लाई के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर भी स्थापित करती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, QDENGA को मंज़ूरी मिलना भारत की डेंगू से लड़ने की कोशिशों में एक अहम कदम है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं