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स्पोर्ट्स खेलने वाली लड़कियों में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Sports Reduce Breast Cancer Risk: वैज्ञानिकों के अनुसार टीनएज को विंडो ऑफ ससेप्टिबिलिटी यानी सेंसिटिव समय माना जाता है. इस दौरान ब्रेस्ट टिश्यू का तेजी से विकास होता है और यह बाहरी कारकों जैसे खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी और लाइफस्टाइल के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं.

स्पोर्ट्स खेलने वाली लड़कियों में ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
वैज्ञानिकों के अनुसार टीनएज को विंडो ऑफ ससेप्टिबिलिटी यानी सेंसिटिव समय माना जाता है.

Breast Cancer Risk Factors: आज के समय में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर बन चुका है. हर साल दुनिया-भर में इसके लाखों नए मामले सामने आते हैं. आमतौर पर ब्रेस्ट कैंसर को वयस्क उम्र की बीमारी माना जाता है, लेकिन अब वैज्ञानिक यह समझने लगे हैं कि इस बीमारी की जड़ें टीनएज में ही पड़ सकती हैं. इसी दिशा में एक नई रिसर्च ने बड़ी जानकारी सामने रखी है. हाल ही में जर्नल ब्रेस्ट कैंसर रिसर्च में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, जो किशोर लड़कियां रेगुलर संगठित खेलों (जैसे स्पोर्ट्स टीम, डांस क्लास आदि) में भाग लेती हैं, उनमें भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कुछ जोखिम संकेत कम पाए गए. खास बात यह है कि यह अध्ययन अश्वेत (Black/African American) और हिस्पैनिक समुदाय की टीनएजर्स पर केंद्रित था.

क्यों खास है किशोरावस्था?

वैज्ञानिकों के अनुसार टीनएज को विंडो ऑफ ससेप्टिबिलिटी यानी सेंसिटिव समय माना जाता है. इस दौरान ब्रेस्ट टिश्यू का तेजी से विकास होता है और यह बाहरी कारकों जैसे खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी और लाइफस्टाइल के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं.

पहले के शोध यह दिखा चुके हैं कि एडल्ट महिलाओं में रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा लगभग 20% तक कम हो सकता है. लेकिन, टीनएज में फिजिकल एक्टिविटी का असर क्या होता है, इस पर अब तक बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी. यही खाली जगह यह नई स्टडी भरने की कोशिश करती है.

स्टडी कैसे की गई? किन लड़कियों पर हुआ शोध?

यह अध्ययन अमेरिका के कोलंबिया ब्रेस्ट कैंसर एंड द एनवायरमेंट रिसर्च प्रोग्राम (Columbia-BCERP) के तहत किया गया. इसमें 11 से 20 साल की 191 किशोर लड़कियां शामिल थीं. स्टडी में 64% लड़कियां हिस्पैनिक थीं. 36% अश्वेत/अफ्रीकी-अमेरिकी थीं.

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शोधकर्ताओं ने ऑप्टिकल स्पेक्ट्रोस्कोपी नाम की एक आधुनिक, बिना दर्द वाली तकनीक का उपयोग करके ब्रेस्ट टिश्यू की संरचना (Breast Tissue Composition) का अध्ययन किया. इस तकनीक से यह मापा गया कि स्तनों में पानी, कोलेजन और फैट की मात्रा कितनी है. साथ ही, लड़कियों से पूछा गया कि उन्होंने पिछले एक हफ्ते में कितनी फिजिकल एक्टिविटी की:

  • ऑर्गेनाइज्ड एक्टिविटी: खेल टीम, डांस क्लास
  • असंगठित गतिविधि: साइकिल चलाना, पार्क में खेलना

स्टडी में क्या सामने आया?

जिन लड़कियों ने पिछले हफ्ते कम से कम 2 घंटे संगठित खेल खेले, उनमें ब्रेस्ट टिश्यू में पानी की मात्रा कम पाई गई. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (शरीर में सेल्स को नुकसान पहुंचाने वाला तनाव) कम था.

वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रेस्ट टिश्यू में पानी की ज्यादा मात्रा को आगे चलकर ज्यादा ब्रेस्ट डेंसिटी से जोड़ा जाता है और ज्यादा डेंसिटी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का एक संकेत मानी जाती है.

हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि इस स्टडी से सीधा कारण-परिणाम साबित नहीं होता, लेकिन यह भविष्य के जोखिम को समझने में मदद जरूर करती है.

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सूजन और तनाव से जुड़े बायोमार्कर

शोध में लड़कियों के यूरिन और ब्लड सैंपल भी लिए गए. इनमें ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का मार्कर: 15-F2t-isoprostane, सूजन के मार्कर: CRP, IL-6, TNF-α है. दिलचस्प बात यह रही कि फिजिकल एक्टिविटी और सूजन से जुड़े मार्करों के बीच कोई साफ संबंध नहीं मिला, लेकिन ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस जरूर कम पाया गया.

इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि 51% लड़कियों ने पिछले हफ्ते कोई भी फिजिकल एक्टिविटी नहीं की. 73% लड़कियां किसी भी तरह के संगठित खेल में शामिल नहीं थीं. यह आंकड़े बताते हैं कि किशोर लड़कियों में फिजिकल इनएक्टिविटी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है.

किशोर लड़कियों को खेल और फिजिकल एक्टिविटी के ज्यादा मौके मिलना बेहद जरूरी है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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