दुनिया भर में दिल की बीमारी मौत की मुख्य वजहों में से एक है, इसलिए हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए नए तरीकों को खोजना जरूरी है. हालांकि हेल्दी खान-पान, रेगुलर एक्सरसाइज और स्मोकिंग जैसी आदतों को दूर रखना हार्ट को हेल्दी रखने के जाने-माने तरीकों मे हैं. लेकिन नई रिसर्च से पता चलता है कि मसल्स की क्वालिटी भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है. 'रेडियोलॉजी' में छपी एक हालिया स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों की छाती और पीठ की मसल्स स्ट्रांग और हेल्दी होती हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा कम हो सकता है.
रिसर्चर का मानना है कि ये मसल्स ओवरऑल फिटनेस और लंबे समय तक हार्ट की हेल्थ के लिए एक अहम संकेत हो सकती है. इस स्टडी में रूटीन हार्ट स्कैन की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया और पाया गया कि जिन लोगों की छाती और पीठ की मसल्स बेहतर क्वालिटी की थीं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा 31% कम था. हालांकि यह स्टडी यह साबित नहीं करती कि मजबूत मसल्स सीधे तौर पर दिल की बीमारी को रोकती हैं, लेकिन यह एक हेल्दी लाइफस्टाइल के हिस्से के तौर पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को शामिल करने की एक और वजह बताती है.
स्टडी में क्या पाया गया? (What Did The Study Find?)
इस रिसर्च में 57 साल की औसत उम्र वाले 1,722 वयस्कों को शामिल किया गया था, जिनकी कोरोनरी कंप्यूटेड टोमोग्राफी एंजियोग्राफी (CCTA) की गई थी. यह एक तरह का हार्ट स्कैन है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर सिकुड़ी या ब्लॉक हो चुकी धमनियों का पता लगाने के लिए किया जाता है. रिसर्च करने वालों ने स्कैन के बाद 10 साल तक इन लोगों पर नजर रखी.
नतीजों से पता चला कि स्कैन में मापी गई मसल्स की क्वालिटी में हर 10-पॉइंट के सुधार के साथ हार्ट अटैक का खतरा 31% कम हो गया. जिन लोगों की मांसपेशियों की क्वालिटी बेहतर थी, उनमें अगले दशक के दौरान मौत का खतरा भी 39% कम था. उम्र, लिंग और नसो में कैल्शियम जमा होने जैसे प्वाइंट्स को ध्यान में रखने के बाद भी ये नतीजे अहम थे.
मसल्स के साइज से ज्यादा उनकी क्वालिटी क्यों मायने रखती है?
सबसे अहम नतीजों में से एक यह था कि मसल्स की क्वालिटी, उनके साइज से ज्यादा मायने रखती है. हेल्दी मांसपेशियों में फैट कम होता है और इमेजिंग स्कैन में वो ज्यादा डेंस दिखती हैं. सिर्फ बड़ी मसल्स होने से वो सेफ्टी नहीं मिलती है.
रिसर्चर्स ने बताया कि अच्छी मसल क्वालिटी आमतौर पर रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और बेहतर सेहत को दिखाती है. जब एक्सरसाइज के जरिए मसल्स का लगातार इस्तेमाल होता है, तो वो ज्यादा स्ट्रांग रहती हैं और उनमें फैट कम होता है. स्ट्रांग मसल्स बेहतर मेटाबॉलिज्म, कम इन्फ्लेमेशन और हार्ट के बेहतर वर्किंग फंक्शन में भी मदद कर सकती है.
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