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तन्वी की मौत पर AIIMS का बड़ा एक्शन, जांच समिति गठित; इलाज और डॉक्टरों के फैसलों की होगी समीक्षा

राजस्थान की 15 वर्षीय तन्वी की मौत के बाद AIIMS ने जांच समिति गठित की है. समिति इलाज, सर्जरी से जुड़े फैसलों और मौत की परिस्थितियों की समीक्षा करेगी.

कैसे होता है दिल में छेद | कारण, लक्षण और उपचार
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देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान AIIMS (नई दिल्ली) में राजस्थान की 15 वर्षीय बच्ची तन्वी की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद AIIMS प्रशासन हरकत में आ गया है. AIIMS निदेशक ने मामले की तहकीकात के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है, जो इलाज की पूरी प्रक्रिया, डॉक्टरों के फैसलों और मौत की परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा करेगी.

घटनाक्रम: तन्वी मौत मामले में AIIMS ने जांच समिति क्यों बनाई?

AIIMS द्वारा 2 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने बच्ची के परिजनों द्वारा उठाए गए सवालों और मीडिया रिपोर्ट्स को गंभीरता से लिया है.

पूरी टाइमलाइन की होगी जांच: निदेशक द्वारा गठित समिति तन्वी के भर्ती होने से लेकर इलाज के तमाम रिकॉर्ड, डायग्नोस्टिक टेस्ट, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों की बिंदुवार पड़ताल करेगी.
संस्थान का रुख: AIIMS ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि वे मरीज सुरक्षा, पारदर्शिता और साक्ष्य-आधारित फैसलों के प्रति प्रतिबद्ध हैं. समिति की अंतिम रिपोर्ट और चल रहे पोस्टमार्टम के नतीजों के बाद ही आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी.

तन्वी केस: 5 बड़ी बातें

  1. AIIMS ने जांच समिति गठित की
  2. 15 वर्षीय तन्वी जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी
  3. परिवार ने इलाज और सर्जरी में देरी के आरोप लगाए
  4. AIIMS का दावा, सर्जरी संभव नहीं थी
  5. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

VSD with Pulmonary Atresia क्या है?

Ventricular Septal Defect (VSD) with Pulmonary Atresia एक गंभीर और दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग है. इसमें दिल के निचले दो चैंबर (वेंट्रिकल्स) के बीच छेद (VSD) होता है, जबकि फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली पल्मोनरी वाल्व या धमनी पूरी तरह विकसित नहीं होती या बंद होती है. इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और बच्चे में सांस फूलना, थकान, त्वचा का नीला पड़ना (सायनोसिस) और विकास में रुकावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
बीमारी की गंभीरता दिल और रक्त वाहिकाओं की संरचना पर निर्भर करती है, इसलिए हर मरीज का उपचार अलग हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार VSD with Pulmonary Atresia एक जटिल जन्मजात हृदय रोग है, जिसमें दिल से फेफड़ों तक रक्त प्रवाह प्रभावित होता है. कई मामलों में बच्चों को शुरुआती उम्र में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है, जबकि कुछ मरीजों में हृदय और रक्त वाहिकाओं की संरचना इतनी जटिल होती है कि उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं. ऐसे मरीजों को लंबे समय तक विशेषज्ञ निगरानी और चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता होती है.

तन्वी की मौत का मामला क्या है?

राजस्थान की रहने वाली तन्वी जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही थी. मंगलवार, 1 सितंबर 2026 की तड़के AIIMS में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

परिजनों के आरोप:

परिजनों का कहना है कि वे वर्षों से तन्वी के इलाज और सर्जरी के लिए AIIMS के चक्कर काट रहे थे. उनका आरोप है कि बार-बार सर्जरी की तारीखें मिलने और उम्मीदें बंधने के बावजूद उसका ऑपरेशन नहीं किया गया. अंततः लंबे इंतजार और कथित लापरवाही के बीच बच्ची ने दम तोड़ दिया.

AIIMS की मेडिकल दलील:

अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि तन्वी Ventricular Septal Defect (VSD) with Pulmonary Atresia नामक बेहद जटिल और गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी. इस बीमारी में दिल से फेफड़ों तक खून ले जाने वाली नस या तो पूरी तरह अनुपस्थित होती है या गंभीर रूप से अवरुद्ध होती है.

2012 से 2026: तन्वी के इलाज की पूरी क्रोनोलॉजी (AIIMS द्वारा जारी) 

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समयावधिअस्पताल में स्थिति व चिकित्सकीय निर्णय
10 अक्टूबर 2012  तन्वी को पहली बार AIIMS की कार्डियोलॉजी OPD में लाया गया, जहां जटिल हृदय रोग की पुष्टि हुई और कार्डियक सर्जरी टीम को रेफर किया गया.
साल 2013सर्जिकल सुधार की संभावना परखने के लिए CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कैथेटराइजेशन जैसी उन्नत जांचें की गईं.
साल 2017विस्तृत जांचों के बाद मेडिकल टीम ने निष्कर्ष निकाला कि दिल की जटिल संरचना के कारण सर्जरी संभव (feasible) नहीं है. मरीज को दवाइयों (Medical Management) और नियमित फॉलो-अप पर रखा गया.
हाल के वर्षपरिवार के आग्रह पर CTVS विभागाध्यक्ष और एक अन्य वरिष्ठ सर्जन से दोबारा राय ली गई; दोनों विशेषज्ञों ने भी केवल दवाओं से इलाज जारी रखने की सलाह दी.
24 अगस्त 2026 तबीयत गंभीर होने पर तन्वी को दोबारा भर्ती किया गया. उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना का मूल्यांकन शुरू हुआ.
1 सितंबर 2026

तड़के 2:50 AM: अचानक कमजोरी, गंभीर सायनोसिस और ऑक्सीजन स्तर गिरकर 48% पर पहुंचा.

3:30 AM: ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जिसके बाद हाइपॉक्सिक अटैक से कार्डियक अरेस्ट हुआ.

5:06 AM: तमाम प्रयासों के बावजूद रिवाइव न होने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया.

तन्वी केस के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

तन्वी मामले ने गंभीर जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर विशेषज्ञ उपचार, रेफरल सिस्टम और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की उपलब्धता को लेकर चर्चा छेड़ दी है. हालांकि इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि जांच समिति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

फिलहाल सभी की निगाहें AIIMS की जांच समिति की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के नतीजों पर टिकी हैं.

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