Heart Health Myths and Facts: दिल की बीमारियों को लेकर फैली गलत धारणाएं आज भी लोगों के बीच बहुत आम हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हार्ट डिजीज एक जटिल बीमारी है और मेडिकल साइंस लगातार बदल रही है. जो बातें कभी सच मानी जाती थीं जैसे फैट हमेशा नुकसानदायक होता है या हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों को होता है, आज उन्हें नए और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण चुनौती दे रहे हैं. सोशल मीडिया रील्स, व्हाट्सऐप फॉरवर्ड्स, पुरानी सलाहें और आधी-अधूरी जानकारी इन मिथ्स को और मजबूत बना देती हैं.
हकीकत यह है कि दिल की बीमारी आज भी दुनिया और भारत में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है. यह उम्र, जेंडर या सामाजिक वर्ग नहीं देखतीय इन मिथ्स पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे बीमारी की पहचान में देरी, जोखिम बढ़ना या झूठा भरोसा पैदा हो सकता है. इन्हीं गलत धारणाओं को साफ करने के लिए हमने दिल्ली के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर समीर गुप्ता से बात की, जो इन 8 बड़े हार्ट हेल्थ मिक्स की सच्चाई बताते हैं.
दिल की सेहत से जुड़े 8 मिथ्स, जिन्हें तुरंत छोड़ देना चाहिए | 7 Myths About Heart Health That You Should Stop Believing Immediately
मिथ्स 1: दिल की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों को होती है
अक्सर लोग मानते हैं कि हार्ट अटैक उम्र बढ़ने पर ही होता है. लेकिन, आज भारत में 30-40 की उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉक्टर के अनुसार, उम्र जोखिम बढ़ाती है, लेकिन युवाओं को सुरक्षा नहीं देती. डायबिटीज, हाई बीपी, स्मोकिंग, नींद की कमी और तनाव जैसे कारण कम उम्र में भी दिल को नुकसान पहुंचाते हैं.
मिथ 2: सीने में दर्द नहीं है तो दिल की समस्या नहीं
सीने में दर्द आम लक्षण है, लेकिन यही एकमात्र संकेत नहीं. खासकर महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों में सांस फूलना, जबड़े या पीठ में दर्द, उलटी, ज्यादा थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं. इन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है.

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मिथ 3: सिर्फ मोटे लोगों को दिल की बीमारी होती है
मोटापा एक कारण है, लेकिन पूरा सच नहीं. कई लोग वजन में ठीक दिखते हैं, फिर भी उन्हें पेट की चर्बी, हाई शुगर या हाई बीपी होता है. खासकर भारतीयों में दुबले लेकिन बीमार लोग भी हाई रिस्क में होते हैं. सिर्फ वजन नहीं, कमर की माप भी जरूरी है.
मिथ 4: हर तरह का फैट दिल के लिए खराब है
यह सोच अब पुरानी हो चुकी है. फर्क इस बात से पड़ता है कि कौन-सा फैट खाया जा रहा है. ट्रांस फैट और ज्यादा सेचुरेटेड फैट नुकसानदेह हैं, जबकि नट्स, बीज, मछली और प्लांट ऑयल से मिलने वाली अनसेचुरेटेड फैट दिल के लिए बेहतर होती है.
मिथ 5: हाई कोलेस्ट्रॉल मतलब दिल की बीमारी
कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह दुश्मन नहीं है. शरीर को इसकी जरूरत होती है. समस्या तब होती है जब LDL ज्यादा और HDL कम हो. कुल कोलेस्ट्रॉल से ज्यादा जरूरी है उसके प्रकार और सूजन (inflammation) को समझना.
मिथ 6: एक्सरसाइज खराब डाइट का असर खत्म कर देती है
एक्सरसाइज जरूरी है, लेकिन गलत खानपान की भरपाई अकेले नहीं कर सकती. दिल की सेहत के लिए मूवमेंट, सही डाइट और अच्छी नींद तीनों जरूरी हैं.

मिथ 7: दिल की बीमारी जेनेटिक है, रोकथाम बेकार है
जेनेटिक्स भूमिका निभाते हैं, लेकिन WHO के मुताबिक 80 प्रतिशत तक दिल की बीमारियां सही लाइफस्टाइल से रोकी जा सकती हैं. सही समय पर बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल बहुत फर्क डालता है.
मिथ 8: सप्लीमेंट्स दिल को हेल्दी बना देते हैं
ओमेगा-3 या हर्बल सप्लीमेंट्स अक्सर बेचे जाते हैं, लेकिन वे पूरे खाने की जगह नहीं ले सकते. फल, सब्जियां, साबुत अनाज और मछली से मिलने वाले पोषक तत्व मिलकर काम करते हैं.
दिल की सेहत से जुड़े मिथक सुनने में आसान लगते हैं, लेकिन इन पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. सही जानकारी, समय पर जांच और बैलेंस लाइफस्टाइल ही दिल को लंबे समय तक हेल्दी रख सकती है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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