Rohtak PGI Organ Donation: हरियाणा के रोहतक स्थित PGIMS से इंसानियत की मिसाल पेश करने वाला मामला सामने आया है. भिवानी के एक 28 साल के ब्रेन डेड युवक के परिवार ने अंगदान (Organ Donation) का फैसला किया. युवक के इस महादान से देश के अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे 8 मरीजों को नया जीवन मिला है. अंग निकालने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीजीआई प्रशासन और डॉक्टरों ने नम आंखों के साथ युवक के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ विदा किया.
सड़क हादसे के बाद पीजीआई में घोषित किया गया था ब्रेन डेड
मृतक युवक के चाचा ने बताया कि बीती 13 मई को भिवानी के लोहारू में युवक का एक्सीडेंट हो गया था. हादसे के बाद उसे गंभीर हालत में रोहतक के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर उसे पीजीआई (PGIMS) रोहतक में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका और पीजीआई की स्पेशल मेडिकल टीम ने युवक को 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया.
इस दुखद खबर के बाद सोटो (SOTO) हरियाणा की टीम ने परिवार की काउंसलिंग की. युवक के परिजनों ने हौसला दिखाते हुए अंगदान के लिए अपनी सहमति दे दी. युवक के चाचा ने भावुक होते हुए कहा कि हमें गर्व है कि हमारा बेटा मरकर भी अमर हो गया है. आज वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसका दिल किसी और के सीने में हमेशा धड़केगा.
ग्रीन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली और पंचकूला एयरलिफ्ट किए गए अंग
पीजीआईएमएस के वाइस चांसलर डॉ. एच. के. अग्रवाल ने बताया कि अंगदान की पूरी प्रक्रिया कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है. शनिवार सुबह करीब 6 बजे ऑर्गन निकालने की प्रक्रिया (Organ Retrieval) शुरू हुई. नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTO) नई दिल्ली और रोटो (ROTO) पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के नियमों के अनुसार अंगों बांटा गया जिसमें युवक का दिल ग्रीन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली के मणिपाल हॉस्पिटल भेजा गया. लिवर को सेना के आरआर (R&R) हॉस्पिटल, दिल्ली ले जाया गया. एक किडनी को एयरलिफ्ट करके चंडी मंदिर आर्मी कमांड हॉस्पिटल, पंचकूला भेजी गई. दूसरी किड़नी और दोनों कॉर्निया पीजीआईएमएस रोहतक में ही वेटिंग लिस्ट के मरीजों के लिए सुरक्षित रखी गई है.
प्रदेश में आई अंगदान की क्रांति - डॉ. एस. के. सिंघल
पीजीआई के निदेशक डॉ. एस. के. सिंघल ने सफल ऑपरेशन के लिए पीजीआई के डॉक्टरों, सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह और हरियाणा पुलिस का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि पुलिस के सहयोग से बनाए गए 'ग्रीन कॉरिडोर' के कारण ही सभी अंगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाया जा सका.
डॉ. सिंघल ने कुलपति डॉ. अग्रवाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दो साल पहले तक लोग अंगदान का नाम सुनकर डर जाते थे, लेकिन आज सही काउंसलिंग के कारण लोग खुद आगे आ रहे हैं। पारदर्शिता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.
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