Himachal Weather News: देश के मैदानी इलाकों में जहां सूरज आग उगल रहा है, वहीं पहाड़ों की रानी कुल्लू में कुदरत ने अलग ही रूप दिखाया है. शनिवार दोपहर बाद कुल्लू के ऊपरी इलाकों में अचानक हुए मौसम परिवर्तन और भीषण ओलावृष्टि ने सेब उत्पादकों की कमर तोड़ दी है. साल भर की कड़ी मेहनत के बाद जब फसल तैयार होने की उम्मीद जगी थी तभी आसमान से बरसे 'सफेद पत्थरों' ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया.
फूलों से लदे बगीचों पर ओलों की मार
शनिवार सुबह तक मौसम सामान्य था लेकिन दोपहर होते-होते नग्गर, नथान और फ़ोज़ल जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में घने बादल छा गए. इसके बाद शुरू हुई तेज ओलावृष्टि ने देखते ही देखते पूरे परिदृश्य को सफेद चादर से ढंक दिया. बागवानों के लिए यह मंजर किसी बुरे सपने से कम नहीं था क्योंकि इस समय सेब के पेड़ों पर फूल (ब्लॉसम) पूरी तरह खिले हुए थे. ओलों की भारी चोट के कारण ये नाजुक फूल झड़ कर जमीन पर गिर गए जिससे भविष्य की पैदावार को भारी चोट पहुंची है.
उत्पादन पर मंडराया संकट
सेब की बागवानी में फ्लावरिंग स्टेज सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. बागवानों का कहना है कि जो फूल झड़ गए हैं वे तो अब फल नहीं बन पाएंगे लेकिन जो फल लग चुके थे उन पर भी ओलों के निशान पड़ गए हैं. ओलों की चोट से फलों की बाहरी सतह पर दाग पड़ जाते हैं जिससे बाजार में उनकी गुणवत्ता कम हो जाती है और बागवानों को उचित दाम नहीं मिल पाते. इस अनपेक्षित बदलाव से पूरे सीजन की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है.
चुनौतीपूर्ण बनी पहाड़ों में बागवानी
बदलते जलवायु चक्र ने अब सेब की खेती को जुआ बना दिया है. बागवानों ने साल भर मेहनत की, समय पर खाद डाली और दवाओं का छिड़काव किया ताकि इस बार बेहतर कमाई हो सके, लेकिन अब उनको भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी अनिश्चितता बनी रह सकती है.
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