प्रतीकात्मक तस्वीर...
- यह गंभीर त्रुटि मशहूर लेखक प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' में की गई है.
- 'रोजा' का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि यह 'एक घातक तथा संक्रामक रोग है.
- जीएसएसटीबी के अध्यक्ष नितिन पेठानी ने इसे 'मुद्रण त्रुटि' करार दिया है.
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अहमदाबाद:
गुजरात स्टेट स्कूल टैक्स्टबुक बोर्ड (जीएसएसटीबी) की चौथी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक में उर्दू शब्द 'रोजा' को एक 'संक्रामक रोग बताया गया, जिससे अतिसार होता है'. रमजान के पाक माह में रखे जाने वाले उपवास को 'रोजा' कहा जाता है. यह गंभीर त्रुटि मशहूर लेखक प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' में की गई है.
इसमें 'रोजा' का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि यह 'एक घातक तथा संक्रामक रोग है, जिसमें दस्त और उलटी आती है'. जीएसएसटीबी के अध्यक्ष नितिन पेठानी ने इसे 'मुद्रण त्रुटि' करार दिया है. शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा इसे सामने लाया गया, जो इसे हटाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह समाज के एक तबके की भावनाओं को आहत करता है.
उन्होंने कहा कि वह राज्य के शिक्षा सचिव और जीएसएसटीबी के अध्यक्ष के समक्ष इसे वापस लेने की मांग करेंगे.
कार्यकर्ता मुजाहिद नफीस ने कहा, 'हमें लगता है कि यह त्रुटि लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जान-बूझकर किया एक प्रयास है, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की. हमने पहले ईसा मसीह के लिए इस्तेमाल किए अपमानजनक शब्दों की जानकारी भी अधिकारियों को दी थी'. नौंवी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक में ईसा मसीह के नाम से पहले 'हैवान' लिखा गया था, जिससे ईसाई समुदाय में इसको लेकर क्रोध उत्पन्न हो गया था.
(इनपुट भाषा से)
इसमें 'रोजा' का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि यह 'एक घातक तथा संक्रामक रोग है, जिसमें दस्त और उलटी आती है'. जीएसएसटीबी के अध्यक्ष नितिन पेठानी ने इसे 'मुद्रण त्रुटि' करार दिया है. शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा इसे सामने लाया गया, जो इसे हटाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह समाज के एक तबके की भावनाओं को आहत करता है.
उन्होंने कहा कि वह राज्य के शिक्षा सचिव और जीएसएसटीबी के अध्यक्ष के समक्ष इसे वापस लेने की मांग करेंगे.
कार्यकर्ता मुजाहिद नफीस ने कहा, 'हमें लगता है कि यह त्रुटि लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जान-बूझकर किया एक प्रयास है, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की. हमने पहले ईसा मसीह के लिए इस्तेमाल किए अपमानजनक शब्दों की जानकारी भी अधिकारियों को दी थी'. नौंवी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक में ईसा मसीह के नाम से पहले 'हैवान' लिखा गया था, जिससे ईसाई समुदाय में इसको लेकर क्रोध उत्पन्न हो गया था.
(इनपुट भाषा से)
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