मेसी की अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप 2026 के क्वार्टरफाइनल में स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गई है, पर मैच के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा ब्रेल एम्बोलो के रेड कार्ड की रही. कई दर्शकों को समझ नहीं आया कि आखिर कुछ ही सेकंड पहले अर्जेंटीना के खिलाड़ी को येलो कार्ड दिखाने वाले रेफरी ने अचानक अपना फैसला क्यों बदल दिया.
दरअसल, मैच के 67वें मिनट में डैन एनडोए के गोल से स्विट्जरलैंड ने स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया था. टीम का कॉन्फिडेंस इतना बढ़ चुका था कि दूसरे हाफ का मुकाबला पूरी तरह से अर्जेंटीना के गोलपोस्ट के आस पास खेला गया. तब स्विट्जरलैंड हावी हो रहा था लेकिन 72वें मिनट में अचानक मैच का रुख बदल गया.
पहली नजर में फाउल माना और दिखाया येलो कार्ड
ब्रेल एम्बोलो दाएं फ्लैंक पर गेंद लेकर आगे बढ़ रहे थे. इसी दौरान अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस उनके करीब आए और एम्बोलो जमीन पर गिर पड़े. रेफरी जोआओ पिन्हेरो ने पहली नजर में इसे फाउल माना और परेडेस को येलो कार्ड दिखा दिया. इसके बाद वीडियो असिस्टेंट रेफरी यानी VAR ने रेफरी को घटना दोबारा देखने की सलाह दी. ऑन-फील्ड मॉनिटर पर रिप्ले देखने के बाद साफ हुआ कि एम्बोलो बिना किसी बड़े संपर्क में आए पहले ही गिर गए थे. अधिकारियों ने इसे सिमुलेशन यानी जानबूझकर फाउल का आभास देने की कोशिश माना.
पेरेडस की जगह एम्बोलो को येलो कार्ड
इसके बाद रेफरी ने अपना पहला फैसला बदल दिया. परेडेस का येलो कार्ड वापस ले लिया गया और उसकी जगह एम्बोलो को सिमुलेशन के लिए येलो कार्ड दिखाया गया. एम्बोलो के लिए ये कदम खतरनाक साबित हुआ, उन्हें मैच के 44वें मिनट में भी गलत तरीके से टैकल के लिए एक येलो कार्ड मिल चुका था. तो 72वें मिनट में मिला यह दूसरा येलो कार्ड सीधे रेड कार्ड में बदल गया और उन्हें मैदान छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.
एम्बोलो के बाहर होने के बाद स्विट्जरलैंड को न केवल बाकी का दूसरा हाफ, बल्कि एक्स्ट्रा टाइम के 30 मिनट भी 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा. बराबरी का गोल करने के बाद जिस टीम के पास मैच का मोमेंटम था, उसे अचानक बड़ा झटका लग गया. एक्स्ट्रा टाइम में 2 गोल दाग कर अर्जेंटीना 3-1 से जीत गई.
यह फैसला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें VAR की मदद से रेफरी ने अपना शुरुआती निर्णय बदल दिया. पहले विरोधी खिलाड़ी को कार्ड दिखाया गया था, लेकिन रिप्ले देखने के बाद वही कार्ड वापस लेकर एम्बोलो को सजा दी गई. यही वजह है कि यह फैसला वर्ल्ड कप 2026 के सबसे चर्चित रेफरिंग फैसलों में शामिल हो गया.
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