- राम मंदिर ट्रस्ट में महंत दिनेंद्र दास प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं. वह अयोध्या के स्थानीय सदस्य हैं.
- दिनेंद्र दास एक्शन मोड में आ रहे नजर है. वह मंदिर की व्यवस्थाएं देख रहे हैं.
- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई बदलाव हुए हैं.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में कई बड़े बदलाव हुए हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद महंत दिनेंद्र दास का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. जो अयोध्या के एकमात्र स्थानीय संत हैं, वह अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के महंत हैं जो 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' प्रबंधन में प्रभारी भूमिका में नजर आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जब राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया था, उसके बाद गठित किए गए मूल ट्रस्ट में अयोध्या से शामिल किए जाने वाले एकमात्र संत थे. ऐसे में 10 साल की उम्र में ही घर छोड़ने वाले महंत दिनेंद्र दास के बारे में जानना भी जरूरी है.
कौन हैं महंत दिनेंद्र दास?
10 साल की उम्र से साधु समाज में शामिल दिनेंद्र दास इस समय अयोध्या के निर्मोही अखाड़ा के महंत हैं और मंदिर का निर्माण करवाने वाले ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं. वह निर्मोही अखाड़ा राम जन्मभूमि कानूनी विवाद में सदियों पुराने और सबसे मुख्य पक्षकार थे. ऐसे में अयोध्या में वह एक प्रभावी महंत माने जाते हैं. वह इस पूरे ट्रस्ट में अयोध्या के एकमात्र स्थानीय निवासी संत सदस्य हैं, जिससे उनका जुड़ाव अयोध्या की जमीनी जनता और स्थानीय साधु-संतों से बहुत गहरा है. साल 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया तो कोर्ट ने विशेष निर्देश दिया था कि नए बनने वाले सरकारी ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को अनिवार्य प्रतिनिधित्व दिया जाए. इसी निर्देश के तहत महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्टी बनाया गया था.
राम मंदिर ट्रस्ट की कर रहे देखरेख
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट में अहम बदलाव हुए हैं. मंदिर की पूरी पासिंग और एंट्री व्यवस्था को सुरक्षित करने के लिए अब सारी जिम्मेदारी महंत दिनेंद्र दास को सौंप दी गई है. पहले यह व्यवस्था चंपत राय और अनिल मिश्रा के पास थी. लेकिन अब यह जिम्मेदारी दिनेंद्र दास संभालेंगे. यानि मंदिर में प्रवेश के लिए जारी होने वाले सभी पास महंत दिनेंद्र दास के नाम से बनाई गई एक नई डिजिटल आईडी के जरिए ही स्वीकृत किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के मोर्चे पर अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन के अलावा ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास ने मोर्चा संभाल रखा. वह सुबह से ही मंदिर परिसर में पहुंच कर सारी व्यवस्थाएं अब खुद ही देख रहे हैं और सबसे ज्यादा सख्ती भी यहां बरती जा रही है.
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महंत दिनेंद्र दास ने जताई थी नाराजगी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद महंत दिनेंद्र दास ने खुलकर नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि भगवान के चढ़ावे में हेराफेरी करने वाले लोग बख्शे नहीं जाने चाहिए और उन्हें मृत्युदंड जैसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने खास तौर पर ट्रस्ट के अंतर बाहरी लोगों के बढ़ते हस्तक्षेप पर सबसे ज्यादा असंतोष जताया था. हालांकि, उन्होंने देश भर के रामभक्तों को आश्वस्त किया है कि रामलला के सोने-चांदी के आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस विवाद का भक्तों के दर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऐसे में जब ट्रस्ट में नए सिरे से बदलाव हुआ तो महंत दिनेंद्र दास को मुख्य भूमिका में ही लाया गया है.
राम मंदिर ट्रस्ट में अहम भूमिका में रहेंगे
माना जा रहा है कि अब महंत दिनेंद्र दास राम मंदिर ट्रस्ट में अहम भूमिका में रहेंगे. क्योंकि सरकार अब मंदिर प्रबंधन में अयोध्या के स्थानीय संतों को आगे रखकर सरकार भी राम मंदिर ट्रस्ट की साख को फिर से स्थापित करना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में महंत दिनेंद्र दास की देखरेख में मंदिर के भीतर कई और बड़े तकनीकी और डिजिटल बदलाव देखने को मिल सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी किसी वित्तीय गड़बड़ी को पूरी तरह रोका जा सके.
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