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आतंकियों की तारीफ वाली किताब छापने वाले तीन प्रकाशक गिरफ्तार; लेखक से भी पूछताछ

इन तीनों प्रकाशकों को समन देकर बुलाया गया था. इनसे पूछताछ की गई और फिर अरेस्ट कर लिया गया. इन प्रकाशकों में से दो दिल्ली के हैं, जबकि एक पब्लिशर जम्मू का है.

आतंकियों की तारीफ वाली किताब छापने वाले तीन प्रकाशक गिरफ्तार; लेखक से भी पूछताछ
  • काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने आतंकियों का महिमांडन करने वाली विवादित पुस्तक के तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया है
  • विवादित पुस्तक में कई आतंकियों का समर्थन किया गया था, जो भारत में बड़े आपराधिक मामलों में वांछित रहे हैं
  • दिल्ली के एक प्रकाशक ने तो विवादित पुस्तक से जुड़े डिजिटल डेटा को गायब करने की कोशिश की थी, अब बरामद हुआ
जम्मू:

आतंकियों का महिमांडन करने वाली किताबें छापने के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है. जम्मू की काउंटर इटेलिजेंस विंग ने तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने विवादित पुस्तक 'लीजेंड्स एंड पर्सनेलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' को छापा था और उन्हें प्रसारित किया था. इस पुस्तक में कई ऐसे आतंकियों का महिमामंडन किया है, जो भारत में कई बड़े कांड में वांछित रहे हैं. इस पुस्तक पर काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद स्कूलों से इन्हें वापस मंगाया गया था. भाजपा के नेता सुनील शर्मा ने तो इस पुस्तक को स्कूलों में रखवाए जाने को अकादमिक जिहाद बताया था. 

सूत्रों का कहना है कि इन तीनों प्रकाशकों को समन देकर बुलाया गया था. इनसे पूछताछ की गई और फिर अरेस्ट कर लिया गया. इन प्रकाशकों में से दो दिल्ली के हैं, जबकि एक पब्लिशर जम्मू का है. सूत्रों का कहना है कि दिल्ली स्थित एक प्रकाशक ने तो पुस्तक से जुड़ा डिजिटल डेटा डिलीट करने की कोशिश भी की थी. हालांकि इंटेलिजेंस विंग ने वह सामग्री हासिल कर ली है. इस मामले की जांच आगे बढ़ने पर कुछ और लोग भी टारगेट पर आ सकते हैं. इन पुस्तकों को लेकर जम्मू-कश्मीर से दिल्ली तक खूब बवाल हुआ था. अंत में उमर अब्दुल्ला सरकार ने इन किताबों को वापस ले लिया था. बीते सप्ताह ही इस मामले में इंटेलिजेंस विंग ने छापेमारी की थी. 

इस दौरान सप्लाई और डिमांड से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे. जांच करने के बाद इन प्रकाशकों को समन जारी किया गया था. ये लोग पहुंचे तो पूछताछ हुई और फिर अरेस्ट कर लिया गया. इस मामले में पुस्तक के एक लेखक संतोष मीणा से भी पूछताछ हुई है. उनसे बात करने के लिए टीम राजस्थान तक गई थी. इसके अलावा एक अन्य लेखक हिलाल अहमद का भी पता लगाया जा रहा है. अब तक इस मामले में एक प्रिंसिपल समेत 8 सरकारी कर्मचारियों को भी सस्पेंड किया जा चुका है. इस मामले में दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए टीम गठित की गई है. इसके अलावा यूएपीए जैसे सख्त प्रावधान के FIR भी दर्ज की गई है.  

अतिवादी और आतंकवादी तत्वों की सराहना किए जाने के चलते इस पुस्तक पर खूब बवाल हुआ. अंत में जम्मू-कश्मीर सरकार ने किताब को वापस लिया और जांच कमेटी गठित की गई. इस पुस्तक में आतंकी मकबूल भट की तारीफ की गई थी. मकबूल ने भारतीय राजनयिक रविंद्र महात्रे का अपहरण किया था और उनका कत्ल कर दिया था. पूरी घटना का वही मास्टरमाइंड था.  इस मामले में भट को फांसी की सजा मिली थी.  इसके अलावा किताब में हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी, मसर्रत आलम, मीरवाइज उमर फारूक और अन्य लोगों की भी तारीफ की गई थी. ये सभी लोग अलगाववादी रहे हैं और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने जैसी मांगें भी करते रहे हैं. 

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