Lautaro Martinez Goal vs England, FIFA World Cup 2026: अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की तो सबसे ज्यादा चर्चा लाउतारो मार्टिनेज की हुई. मैदान पर उनका वही आक्रामक अंदाज एक बार फिर देखने को मिला, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में शामिल कर दिया है. लेकिन आज जिस खिलाड़ी की पूरी दुनिया तारीफ कर रही है, कभी उसी लाउतारो को यह कहकर ठुकरा दिया गया था कि वह बड़े क्लब के लायक नहीं हैं.
आर्थिक तंगी में बीता बचपन, पिता ने नहीं मानने दी हार
22 अगस्त 1997 को अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका शहर में जन्मे लाउतारो मार्टिनेज का बचपन संघर्षों से भरा रहा. उनके पिता मारियो मार्टिनेज निचले स्तर की लीग में फुटबॉल खेलते थे. घर में फुटबॉल जरूर था, लेकिन पैसे की हमेशा कमी रही. कई बार हालात ऐसे बने कि परिवार को खर्च चलाने में भी मुश्किल होती थी. पिता का सपना था कि बेटा वहां पहुंचे, जहां वह खुद नहीं पहुंच सके. लाउतारो ने भी बचपन से यही ठान लिया कि एक दिन अर्जेंटीना की जर्सी पहनकर अपने परिवार का नाम रोशन करेंगे.
फुटबॉल नहीं, पहले बास्केटबॉल था पहला प्यार
कम ही लोग जानते हैं कि लाउतारो ने शुरुआत फुटबॉल से नहीं, बल्कि बास्केटबॉल से की थी. 15 साल की उम्र तक वह स्थानीय क्लब के लिए बास्केटबॉल खेलते रहे. बाद में उन्होंने फैसला किया कि अब पूरा ध्यान फुटबॉल पर लगाएंगे. आज भी वह मानते हैं कि बास्केटबॉल ने उनकी जंप, बैलेंस और मैदान को पढ़ने की क्षमता को काफी बेहतर बनाया.
जब बोका जूनियर्स ने कहा- तुम हमारे काम के नहीं हो
हर खिलाड़ी के करियर में एक ऐसा पल आता है जो उसे तोड़ भी सकता है और बना भी सकता है. लाउतारो के लिए वह पल बोका जूनियर्स का ट्रायल था. देश के सबसे बड़े क्लबों में शामिल बोका जूनियर्स ने उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि उनमें स्पीड और ताकत की कमी है. यह फैसला लाउतारो के लिए बड़ा झटका था. वह इतने निराश हो गए कि फुटबॉल छोड़ने तक का मन बना लिया, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें संभाला और समझाया कि एक रिजेक्शन से जिंदगी खत्म नहीं होती.
रेसिंग क्लब ने पहचानी असली प्रतिभा
बोका जूनियर्स से लौटने के बाद रेसिंग क्लब के कोच फैबियो राडैली ने लाउतारो पर भरोसा जताया. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. रेसिंग क्लब की युवा टीम में उन्होंने लगातार मेहनत की और कुछ ही समय में सीनियर टीम तक पहुंच गए. मैदान पर उनका निडर खेल देखकर हर कोई प्रभावित होने लगा.
सिर पर पट्टी बांधकर दोबारा मैदान में उतरे
अर्जेंटीना की अंडर-20 टीम के लिए खेलते समय एक मैच में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी. डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन लाउतारो ने हार नहीं मानी. सिर पर पट्टी बांधकर वह दोबारा मैदान में उतरे और गोल भी किया. इसी जज्बे ने यूरोप के बड़े क्लबों का ध्यान उनकी ओर खींचा.
ऐसे मिला 'द बुल' नाम
रेसिंग क्लब में उनके साथी खिलाड़ी और कोच उनकी ताकत और आक्रामक खेल से काफी प्रभावित थे. डिफेंडरों से बिना डरे भिड़ना और हर गेंद के लिए पूरी ताकत लगा देना उनकी पहचान बन गया. इसी वजह से उन्हें 'एल टोरो' यानी 'द बुल' का नाम मिला. आज भी दुनिया भर के फुटबॉल फैंस उन्हें इसी नाम से जानते हैं.
अर्जेंटीना के दिग्गज स्ट्राइकर डिएगो मिलिटो ने लाउतारो की प्रतिभा को सबसे पहले पहचाना. उस समय वह रेसिंग क्लब के स्पोर्टिंग डायरेक्टर थे. मिलिटो ने ही इंटर मिलान को सलाह दी कि इस युवा स्ट्राइकर को साइन किया जाए. इंटर ने मौका दिया और लाउतारो ने उसे दोनों हाथों से स्वीकार कर लिया.
आज अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत
जिस खिलाड़ी को कभी बड़े क्लब ने रिजेक्ट कर दिया था, वही आज इंटर मिलान का कप्तान है और अर्जेंटीना की टीम का सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकर माना जाता है. इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 की जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लाउतारो मार्टिनेज सिर्फ गोल करने वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल हैं, जिनकी कहानी हर युवा खिलाड़ी को प्रेरित कर सकती है.
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