Mikel Oyarzabal Spain Superstar Success Story, FIFA World Cup 2026: कुछ खिलाड़ी अपनी रफ्तार से पहचान बनाते हैं, कुछ अपने हुनर से. लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनकी सबसे बड़ी ताकत मुश्किल वक्त में हार नहीं मानना होती है. मिकेल ओयारजाबल उन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं. आज पूरा स्पेन उन्हें 'साइलेंट किलर' के नाम से जानता है. मैदान पर वह ज्यादा शोर नहीं मचाते, बड़े-बड़े बयान नहीं देते, लेकिन जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब वही खिलाड़ी निर्णायक वार करता है. FIFA वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में फ्रांस के खिलाफ पेनल्टी पर पहला गोल करके ओयारजाबल ने स्पेन को फाइनल की राह दिखाई. यह टूर्नामेंट का उनका पांचवां गोल था. इसके साथ ही उन्होंने एक विश्व कप में स्पेन के लिए सबसे ज्यादा गोल करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
इससे पहले 1986 में एमिलियो बुट्रागुएनो और 2010 में डेविड विला भी एक ही विश्व कप में पांच-पांच गोल कर चुके हैं. अब फाइनल में उनके पास अकेले इस रिकॉर्ड के मालिक बनने का मौका होगा, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था. मार्च 2022 में आई एक चोट ने उनका पूरा करियर दांव पर लगा दिया था.
जब पूरा करियर लगा था दांव पर
ACL यानी घुटने के लिगामेंट की गंभीर चोट किसी भी फुटबॉलर के लिए सबसे डरावनी चोटों में गिनी जाती है. यही चोट ओयारजाबल के साथ भी हुई. सर्जरी तय थी, मैदान से लंबी दूरी तय थी और सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या वह पहले जैसे खिलाड़ी बन पाएंगे.
ऑपरेशन के बाद असली लड़ाई शुरू हुई.
रियल सोसिएदाद की ट्रेनिंग फैसिलिटी 'जुबिएटा' में उन्होंने महीनों तक फिजियोथेरेपिस्ट के साथ घंटों मेहनत की. शुरुआत में उनका लक्ष्य फुटबॉल नहीं, सिर्फ घुटने की सूजन कम करना और मांसपेशियों को कमजोर होने से बचाना था. इसके बाद पानी के भीतर हाइड्रोथेरेपी के जरिए शरीर को दोबारा तैयार किया गया. धीरे-धीरे जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू हुई. पैरों की ताकत लौटाने के लिए लगातार वेट और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज की गईं. दौड़ने की इजाजत मिलने से पहले उन्होंने महीनों तक सिर्फ घुटने को स्थिर रखने वाले छोटे-छोटे अभ्यास किए. यह सफर सिर्फ शरीर का नहीं, मानसिक मजबूती का भी था.
रिकवरी के दौरान ओयारजाबल शायद ही कोई दिन ऐसा छोड़ते थे, जब वह तय समय से पहले ट्रेनिंग सेंटर न पहुंचे हों. उन्होंने अपनी डाइट से लेकर नींद तक हर चीज पर अनुशासन रखा. मेडिकल स्टाफ की हर सलाह को पूरी गंभीरता से अपनाया और जल्दबाजी में मैदान पर लौटने का कोई जोखिम नहीं लिया. इस कठिन दौर में रियल सोसिएदाद भी उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा. क्लब ने उन पर वापसी का दबाव नहीं बनाया. कोच और साथी खिलाड़ियों ने उन्हें टीम का हिस्सा बनाए रखा, जिससे उनका आत्मविश्वास कभी टूटने नहीं पाया. हालांकि सिर्फ फिट होकर लौटना ही काफी नहीं था.
ओयारजाबल ने यह समझ लिया था कि ACL चोट के बाद पहले जैसी गति पर पूरी तरह निर्भर रहना आसान नहीं होगा. यहीं उन्होंने अपने खेल का सबसे बड़ा बदलाव किया. पहले वह विंग पर खेलते थे, जहां लगातार लंबी दौड़ और तेज रफ्तार सबसे बड़ा हथियार होती है. वापसी के बाद उन्होंने सेंटर-फॉरवर्ड की भूमिका अपनाई. उन्होंने अपनी ऊर्जा बचाना सीखा. दौड़ कम की, लेकिन सही समय पर सही जगह पहुंचने की कला को और निखारा. पोजिशनिंग, मूवमेंट और फिनिशिंग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. यही बदलाव आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. अब वह सिर्फ मौके नहीं बनाते, बल्कि मैच का नतीजा भी तय करते हैं.
फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण रहा. जिस खिलाड़ी के करियर पर कभी सवाल उठ रहे थे, उसी ने दबाव से भरे मुकाबले में पेनल्टी को गोल में बदलकर स्पेन को बढ़त दिलाई और फाइनल का रास्ता खोल दिया. ओयारजाबल की कहानी सिर्फ चोट से वापसी की कहानी नहीं है. यह उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने हालात बदलने का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद को बदल दिया. शायद यही वजह है कि आज वह स्पेन के 'साइलेंट किलर' हैं और विश्व कप फाइनल में इतिहास लिखने से सिर्फ एक गोल दूर खड़े हैं.
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