Vat Purnima 2022: क्या है वट पूर्णिमा का महत्व यहां जानें व्रत के लिए 5 भोग रेसिपीज के बारे में

कुछ उत्सव क्षेत्र-विशिष्ट रहते हैं. ऐसा ही एक त्योहार है वट सावित्री व्रत या वट पूर्णिमा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल ज्येष्ठ महीने में या पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है.

Vat Purnima 2022: क्या है वट पूर्णिमा का महत्व यहां जानें व्रत के लिए 5 भोग रेसिपीज के बारे में

खास बातें

  • भारत विविधता और महान विरासत का देश है.
  • यहां हर त्योहार को बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं.
  • इनमें से कुछ त्योहारों की देश भर में लोकप्रियता है.

भारत विविधता और महान विरासत का देश है. उसी के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक त्योहार है. हमारे पास पूरे भारत में त्योहारों की एक लंबी सूची है - जिनमें से हर किसी को बहुत उत्साह  के साथ मनाया जाता है. जबकि इनमें से कुछ त्योहारों की देश भर में लोकप्रियता है (जैसे होली, दिवाली और दशहरा), कुछ उत्सव क्षेत्र-विशिष्ट रहते हैं. ऐसा ही एक त्योहार है वट सावित्री व्रत या वट पूर्णिमा. महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में प्रमुख रूप से मनाया जाने वाला यह त्योहार विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति के स्वास्थ्य और समृद्धि (जैसे तीज और करवा चौथ) के लिए मनाया जाता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल ज्येष्ठ महीने में या पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है.

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Vat Purnima 2022: वट सावित्री व्रत की तिथि और समय:

व्रत का नाम हिंदू देवी सावित्री के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने किंवदंतियों के अनुसार, अपनी भक्ति और दृढ़ता के साथ मृत्यु के देवता - यमराज से अपने पति के जीवन को पुनः प्राप्त किया. इस साल वट सावित्री का व्रत 14 जून 2022 (मंगलवार) को पड़ रहा है.

पूर्णिमा तिथि शुरू - 13 जून, 2022 को रात 09:02

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 14 जून 2022 को शाम 05:21 बजे

(स्रोत: www.drikpanchang.com)

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Vat Purnima 2022: वट सावित्री व्रत का महत्व और अनुष्ठान:

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, त्योहार देवी सावित्री की भक्ति का प्रतीक है, जिन्होंने यमराज से अपने पति सत्यवान के जीवन को पुनः प्राप्त किया. इस दिन, विवाहित महिलाएं पूरे रीति रिवाज के साथ व्रत रखती हैं, नए कपड़े और आभूषण पहनती हैं और पूजा करती हैं. वे बरगद के पेड़ के चारों ओर एक पवित्र धागा भी बांधती हैं और सावित्री और सत्यवान की महान कथा सुनती हैं. जिन लोगों को पता नहीं है तो उन्हें बता दें कि 'वट' बरगद के पेड़ के लिए किया जाने वाला शब्द है, जो अनुष्ठान में बहुत महत्व रखता है. ऐसा कहा जाता है कि देवी सावित्री ने एक बरगद के पेड़ के नीचे अपने पति का जीवन वापस पा लिया था.

भक्त चावल, दाल, मौसमी फल और बहुत सारी चीजों के साथ भोग (या प्रसाद) भी तैयार करते हैं. पूजा के बाद महिलाएं अपने पति से आशीर्वाद लेती हैं और प्रसाद के साथ व्रत तोड़ती हैं.

Vat Purnima 2022: वट सावित्री व्रत पूजा के लिए 5 भोग रेसिपी:

शकरकंद चाट:

हर पूजा एक भव्य दावत से जुड़ी होती है. और हम बिना चाट के दावत कैसे मना सकते हैं?! यहां एक शकरकंद चाट रेसिपी है जिसे शकरकंद, काली मिर्च, आमचूर पाउडर, नींबू के रस और सेंधा नमक के साथ तैयार किया जा सकता है. रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.

कुट्टू दही भल्ला:

हम सभी दही भल्ला बहुत पसंद करते हैं. नरम भल्ला, मसालेदार दही में डुबोया जाता है और ऊपर से सेव के साथ परोसा जाता है - दही भल्ला स्वादिष्ट होता है. यहां एक व्रत स्पेशल दही भल्ला रेसिपी लेकर आए है जिसे कुट्टू आटे और सेंधा नमक के साथ बनाया जा सकता है. रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.

नवरतन पुलाव:

नवरतन पुलाव लंबे बासमती चावल, ताजी सब्जियों और सूखे मेवों से बनाया जाता है, जो न सिर्फ बहुत स्वादिष्ट पुलाव है, बल्कि काफी मजेदार भी है. खास मौके के लिए ये सबसे बेस्ट डिश है. रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.

आलू की कढ़ी:

यहां एक व्रत वाली आलू कढ़ी रेसिपी है जिसे आप अपने व्रत स्पेशल मील के साथ जोड़ सकते है. उबले हुए आलू, कुट्टू आटा और दही के साथ मिलाकर तैयार होने वाली इस कढ़ी को समक चावल के साथ परोसा जाता है, यह एक पौष्टिक व्रत भोजन बनाता है. रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.

पायसम:

इसे खीर कहें, पायेश या पायसम, एक भारतीय उत्सव की दावत इस मीठे व्यंजन के बिना पूरी नहीं होती है. परंपरागत रूप से, इसे कई मंदिरों में प्रसाद के रूप में भी परोसा जाता है. पायसम बनाने के लिए आपको दूध, चावल, चीनी और सूखे मेवे चाहिए और कुछ ही समय में आप से बना सकते हैं. रेसिपी के लिए यहां क्लिक करें.

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