Ramadan 2026: रमजान का महीना आज से शुरू हो गया है पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय इस महीने को इबादत, सब्र और आत्म-संयम के रूप में मनाता है. रमजान महीने का महत्व सिर्फ भूखा-प्यासा रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, दान-पुण्य, नमाज और कुरान की तिलावत का महीना है. इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह नौवां महीना होता है और चांद दिखने के साथ इसकी शुरुआत होती है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि रोजा खोलते समय सबसे पहले खजूर ही क्यों खाई जाती है? क्यों यह परंपरा सदियों से चली आ रही है? आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण.
खजूर से रोजा खोलने के पीछे का धार्मिक कारण
पैगंबर मुहम्मद की परंपरा (सुन्नत) के अनुसार रोजा खजूर से खोलना पसंदीदा तरीका माना गया है. हदीसों में उल्लेख मिलता है कि वे इफ्तार के समय ताजा या सूखी खजूर से रोजा खोला करते थे. इसलिए आज भी दुनिया भर के मुसलमान इस परंपरा का पालन करते हैं. यह सिर्फ एक खानपान की आदत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जुड़ाव है जो आस्था को मजबूत बनाता है.
खजूर एनर्जी का नेचुरल खजाना
खजूर एक ऐसा फल है जो तुरंत एनर्जी देने के लिए जाना जाता है. पूरे दिन रोजा रखने के बाद शरीर में ग्लूकोज की कमी हो जाती है. ऐसे में खजूर खाने से तुरंत शुगर लेवल बैलेंस होता है और शरीर को एनर्जी मिलती है.

क्यों है खजूर खास?
- प्राकृतिक शुगर से भरपूर: इसमें ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़ और सुक्रोज़ होते हैं, जो तुरंत ताकत देते हैं.
- फाइबर से भरपूर: पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज से बचाता है.
- पोटैशियम और मैग्नीशियम: दिल और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद.
- आयरन का स्रोत: खून की कमी को दूर करने में मददगार.
- एंटीऑक्सीडेंट गुण: शरीर को बीमारियों से बचाने में सहायक.
खाली पेट खाने के लिए सुरक्षित
पूरे दिन खाली पेट रहने के बाद भारी या तली-भुनी चीजें खाने से पेट पर अचानक दबाव पड़ता है. खजूर हल्की, आसानी से पचने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, इफ्तार की शुरुआत हल्की और मीठी चीजें खाने से करने से शरीर धीरे-धीरे भोजन को स्वीकार करता है. इसलिए खजूर एक आदर्श विकल्प मानी जाती है.
आध्यात्मिक संदेश भी छुपा है
रमजान सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा को भी अनुशासन सिखाता है. खजूर सादगी और विनम्रता का प्रतीक है. यह हमें याद दिलाती है कि सादगी में भी पोषण और संतोष छुपा होता है. रमजान का असली उद्देश्य दूसरों की भूख और तकलीफ को समझना है. इसलिए इस महीने में जकात (दान) और जरूरतमंदों की मदद पर खास जोर दिया जाता है.
खजूर से रोजा खोलने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सेहत के नजरिए से भी बेहद समझदारी भरी है. इस रमजान 2026 में जब आप इफ्तार के समय पहली खजूर खाएं, तो याद रखें कि यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक परंपरा, एक विज्ञान और एक आध्यात्मिक संदेश है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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