Duniya Mein Pehli Idli Kaha Se Ayi: भारत में हल्के और हेल्दी नाश्ते की बात हो तो इडली का नाम जरूर लिया जाता है. दक्षिण भारत की यह डिश आज पूरे देश में बेहद फेमस है. होटल हो या घर का किचन, इडली-सांभर और नारियल चटनी का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस साधारण दिखने वाली डिश का इतिहास काफी पुराना है. इतिहासकारों के अनुसार इडली का जिक्र कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसकी उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत भी मौजूद हैं.
इडली का सबसे पहला जिक्र कहां मिलता है?
जानकारों के मुताबिक इडली जैसी डिश का सबसे पुराना जिक्र 10वीं सदी के कन्नड़ साहित्य ‘वड्डाराधने' में मिलता है, जिसे शिवकोटि आचार्य ने लिखा था. इस ग्रंथ में ‘इद्दालिगे' नाम के एक व्यंजन का उल्लेख किया गया है. माना जाता है कि यह आज की इडली से मिलता-जुलता भोजन था.
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इसके अलावा 12वीं सदी के संस्कृत ग्रंथ ‘मानसोल्लासा', जिसे राजा सोमेश्वर तृतीय ने लिखा था, उसमें भी भाप में पकाए जाने वाले एक ऐसे व्यंजन का जिक्र मिलता है जो इडली जैसा माना जाता है. तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘पेरिया पुराणम' में भी इस तरह के भोजन का उल्लेख देखने को मिलता है.
इतिहासकारों का कहना है कि उस समय की इडली आज जैसी नहीं थी. शुरुआती दौर में इसे मुख्य रूप से दाल के मिश्रण से तैयार किया जाता था और बाद में चावल का इस्तेमाल शुरू हुआ.
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इंडोनेशिया से आई थी इडली
कर्नाटक के प्रसिद्ध फूड इतिहासकार के.टी. आचार्य ने एक दिलचस्प सिद्धांत बताया है. उनके अनुसार इडली जैसी डिश की शुरुआत संभवतः 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच इंडोनेशिया में हुई थी. वहां केडली या केदारी नाम से एक फर्मेंटेड चावल का केक बनाया जाता था. पुराने समय में भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध काफी मजबूत थे. 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच शैलेंद्र, संजय और कई अन्य हिंदू राजवंशों ने इंडोनेशिया पर शासन किया. छुट्टियों में जब ये शासक भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने या अपने लिए दुल्हन की खोज में आते थे, तो वे अपने साथ शाही रसोइयों को भी लाते थे. इसी दौरान यह रेसिपी भारत पहुंची और धीरे-धीरे स्थानीय स्वाद के अनुसार बदलती गई.
अरब व्यापारियों से जुड़ी एक और कहानी
इडली की शुरुआत को लेकर एक और मत सामने आता है. कुछ किताबों में बताया गया है कि भारत में बसे अरब व्यापारी चावल से बने गोल पकवान खाते थे, जिन्हें नारियल की ग्रेवी के साथ परोसा जाता था. माना जाता है कि फर्मेंटेशन की तकनीक के कारण यह भोजन धीरे-धीरे भारतीय रसोई में नए रूप में विकसित हुआ.
पत्थर के बर्तन में बनी थी दुनिया की पहली इडली
इडली के शुरुआती दौर में लोग बड़े पत्थर के बर्तनों का उपयोग करते थे. इन बर्तनों को अंदर से गोल आकार में तराशा जाता था. नीचे पानी भरकर उसे गर्म किया जाता था, और ऊपर भाप से इडली पकाई जाती थी. यही उस समय का पहला इडली सांचा माना जाता है.
आज चाहे इसकी शुरुआत कहीं से भी हुई हो, लेकिन इडली भारतीय भोजन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है और हेल्दी नाश्ते के रूप में पूरे देश में पसंद की जाती है.
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