
नई दिल्ली:
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की धूम रहती है और राज्य की राजधानी मुंबई में तो गणपति पर्व एक मुख्य त्योहार के तौर पर मनाया जाता है। फिर भला बॉलीवुड ‘गणपति बप्पा मोरया’ कहने से कैसे बच सकता है। ढोल नगाड़ों के साथ भगवान गणेश को घर लाने, उनकी पूजा, विसर्जन और उन्हें अपने सुख-दुख के बारे में बताने से लेकर गणेशोत्सव की आड़ में स्वार्थपूर्ति जैसे कई घटनाक्रम को बॉलीवुड ने कई फिल्मों में दिलचस्प तरीके से पेश किया है।
सामयिक विषयों पर वृत्तचित्र बनाने वाली लवलीन थडानी ने कहा, मुंबई में गणेशोत्सव की शुरुआत 1920 के दशक में बाल गंगाधर तिलक ने चौपाटी की एक गली से की थी। गणेशोत्सव ने फिल्मों में भी अपनी जगह बना ली। इसे फिल्मों में दिखाने के लिए मुख्य प्रतिमा के आगे नायक या नायिका की शूटिंग तो की जाती है, लेकिन स्थानीय संस्कृति दिखाने के लिए गणेशोत्सव के दौरान लिए गए फुटेज भी प्रयुक्त किए जाते हैं। फिल्म समीक्षक अनिरुद्ध मिश्रा ने कहा, किसी पीड़ा या तकलीफ से मुक्ति के लिए तो नायक या नायिका को गणपति पूजा करते हुए दिखाया जाता है। किसी भी उत्सव की आड़ में होने वाले अपराध दिखाने के लिए भी फिल्मों में इसका उपयोग किया गया है। जितेंद्र और संजीव कुमार अभिनीत ‘तकरार’ में गणेश की प्रतिमा में रखकर मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है। गणेश मंडलों की राजनीति देखनी हो तो नाना पाटेकर की ‘अंकुश’ देखें।’’
फिल्म समीक्षक चैताली नोन्हारे ने कहा कि पुरानी ‘अग्निपथ’ में गुस्से से भरे अमिताभ ऐसे समय अपने गांव लौटते हैं जब वहां गणेशोत्सव की धूम मची होती है। वर्ष 2012 में रितिक रोशन और संजय दत्त अभिनीत नई ‘अग्निपथ’ आई, जिसमें विशाल भव्य गणपति प्रतिमा के साथ यह उत्सव दिखाया गया है। दोनों ही फिल्मों में कहानी का तानाबाना इस तरह बुना गया कि अपराध की साजिशों के बीच गणेशोत्सव और इसका फायदा उठाने की कोशिश में असामान्य कुछ नहीं लगता। मूल ‘डॉन’ में अमिताभ और उसके सीक्वल में शाहरुख खान गणेशोत्सव में ढोल बजा कर बच्चों की पढ़ाई के लिए धन का इंतजाम करते नजर आते हैं। वर्ष 2009 में सलमान खान फिल्म ‘वान्टेड’ में गणपति पूजा करते नजर आए। उन पर फिल्माया गया गीत ‘तेरा ही जलवा’ बहुत लोकप्रिय हुआ। आज गणेशोत्सव में यह गीत अक्सर बजाया जाता है।
अनिरुद्ध ने कहा, फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में सुनील दत्त गंभीर बीमारी से पीड़ित अपनी बेटी के ठीक होने की कामना करते हुए गणपति स्थापना करते हैं। हालांकि फिल्मों में इस तरह के दृश्यों की खास जरूरत नहीं होती, लेकिन इन्हें हमारी संस्कृति के प्रतीक के तौर पर रखा जाना गलत भी नहीं है। 'हम पांच', 'प्रतिघात' और भी कई फिल्में हैं, जिनमें परंपरागत गणेशोत्सव को सामयिक परिदृष्य के साथ दिखाया गया है। विघ्नहर्ता को हर शुभ काम से पहले याद करने का चलन रहा है और ऐसा माना जाता है कि गणेश वंदना से शुरू होने वाले काम आसानी से बन जाते हैं। ऐसे में रूपहली दुनिया के लोग भी अगर अपनी फिल्मों में गणेशोत्सव की धूम दिखाकर इसके सफल होने की कामना करते हैं तो इसमें गलत क्या है।
सामयिक विषयों पर वृत्तचित्र बनाने वाली लवलीन थडानी ने कहा, मुंबई में गणेशोत्सव की शुरुआत 1920 के दशक में बाल गंगाधर तिलक ने चौपाटी की एक गली से की थी। गणेशोत्सव ने फिल्मों में भी अपनी जगह बना ली। इसे फिल्मों में दिखाने के लिए मुख्य प्रतिमा के आगे नायक या नायिका की शूटिंग तो की जाती है, लेकिन स्थानीय संस्कृति दिखाने के लिए गणेशोत्सव के दौरान लिए गए फुटेज भी प्रयुक्त किए जाते हैं। फिल्म समीक्षक अनिरुद्ध मिश्रा ने कहा, किसी पीड़ा या तकलीफ से मुक्ति के लिए तो नायक या नायिका को गणपति पूजा करते हुए दिखाया जाता है। किसी भी उत्सव की आड़ में होने वाले अपराध दिखाने के लिए भी फिल्मों में इसका उपयोग किया गया है। जितेंद्र और संजीव कुमार अभिनीत ‘तकरार’ में गणेश की प्रतिमा में रखकर मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है। गणेश मंडलों की राजनीति देखनी हो तो नाना पाटेकर की ‘अंकुश’ देखें।’’
फिल्म समीक्षक चैताली नोन्हारे ने कहा कि पुरानी ‘अग्निपथ’ में गुस्से से भरे अमिताभ ऐसे समय अपने गांव लौटते हैं जब वहां गणेशोत्सव की धूम मची होती है। वर्ष 2012 में रितिक रोशन और संजय दत्त अभिनीत नई ‘अग्निपथ’ आई, जिसमें विशाल भव्य गणपति प्रतिमा के साथ यह उत्सव दिखाया गया है। दोनों ही फिल्मों में कहानी का तानाबाना इस तरह बुना गया कि अपराध की साजिशों के बीच गणेशोत्सव और इसका फायदा उठाने की कोशिश में असामान्य कुछ नहीं लगता। मूल ‘डॉन’ में अमिताभ और उसके सीक्वल में शाहरुख खान गणेशोत्सव में ढोल बजा कर बच्चों की पढ़ाई के लिए धन का इंतजाम करते नजर आते हैं। वर्ष 2009 में सलमान खान फिल्म ‘वान्टेड’ में गणपति पूजा करते नजर आए। उन पर फिल्माया गया गीत ‘तेरा ही जलवा’ बहुत लोकप्रिय हुआ। आज गणेशोत्सव में यह गीत अक्सर बजाया जाता है।
अनिरुद्ध ने कहा, फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में सुनील दत्त गंभीर बीमारी से पीड़ित अपनी बेटी के ठीक होने की कामना करते हुए गणपति स्थापना करते हैं। हालांकि फिल्मों में इस तरह के दृश्यों की खास जरूरत नहीं होती, लेकिन इन्हें हमारी संस्कृति के प्रतीक के तौर पर रखा जाना गलत भी नहीं है। 'हम पांच', 'प्रतिघात' और भी कई फिल्में हैं, जिनमें परंपरागत गणेशोत्सव को सामयिक परिदृष्य के साथ दिखाया गया है। विघ्नहर्ता को हर शुभ काम से पहले याद करने का चलन रहा है और ऐसा माना जाता है कि गणेश वंदना से शुरू होने वाले काम आसानी से बन जाते हैं। ऐसे में रूपहली दुनिया के लोग भी अगर अपनी फिल्मों में गणेशोत्सव की धूम दिखाकर इसके सफल होने की कामना करते हैं तो इसमें गलत क्या है।
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