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This Article is From Nov 13, 2012

कुल मिलाकर मनोरंजक फिल्म है 'सन ऑफ सरदार'

Quick Take
Summary is AI generated, newsroom reviewed.
'सन ऑफ सरदार' को एक कॉमेडी फिल्म बताया गया। फर्स्ट हाफ बहुत बढ़िया है, लेकिन सेकेंड हाफ थोड़ा कमजोर पड़ गया है, जिसकी वजह से फिल्म खिंची हुई नजर आती है।
मुम्बई: फिल्म 'सन ऑफ सरदार' की कहानी शुरू होती है फिल्म के टाइटल सॉन्ग के साथ। लंदन में बसा जस्सी यानी अजय देवगन करीब 25 सालों बाद भारत आता है, अपनी खानदानी जमीन बेचने, जहां 25 सालों से इंतजार कर रहा है उसका खानदानी दुश्मन संजय दत्त का परिवार।

संजय दत्त का परिवार अपनी दुश्मनी का बदला लेना चाहता है और अंजाने में अजय देवगन ही संजय दत्त के घर में मेहमान बनकर आ जाते हैं। जैसे ही दोनों को पता चलता है कि दोनों खानदानी दुश्मन हैं, संजय दत्त कोशिश करते हैं कि अजय देवगन उनके घर से बाहर निकलें और वह उसे मारकर अपना बदला ले सकें।

अजय घर में रुकने का बहाना ढूंढ़ते हैं, ताकि वह अपनी जान बचा सकें, क्योंकि संजय दत्त के परिवार में मेहमान को भगवान मानते हैं, इसलिए वह घर में अजय को नहीं मार सकते।

'सन ऑफ सरदार' को एक कॉमेडी फिल्म कहा गया है, लेकिन सिर्फ फर्स्ट हाफ में। फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत ही मजेदार है, जो खूब हंसाता है, लेकिन सेकेंड हाफ कमजोर पड़ गया।

कलाकारों का अभिनय और एक्शन अच्छा है, लेकिन संगीत थोड़ा कमजोर है। अजय देवगन को घर से निकालने की प्रक्रिया में हंसी नहीं आती। लंबे-लंबे सीन्स हैं, जिसकी वजह से फिल्म थोड़ी खिंची हुई लगती है। इस फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है 3 स्टार।

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