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This Article is From Dec 21, 2012

एंटरटेनमेंट का डोज़ है 'दबंग-2'

मुंबई: लोग दिल थामकर 'दबंग-2’ का इंतजार रहे थे। फिल्म की कहानी पहले भाग से आगे बढ़ती है, जहां चुलबुल पांडे का ट्रांसफर लालगंज से कानपुर हो गया है और वह अपनी पत्नी रज्जो यानी सोनाक्षी सिन्हा, भाई मक्खी यानी अरबाज और उनके पिता बने विनोद खन्ना के साथ कानपुर जाते हैं और यहां से शुरू होती है, रॉबिनहुड पांडे की गरीबों के लिए दरियादिली और गुंडे-बदमाशों के लिए शेरदिली।

शुरू के करीब 15 मिनट की फिल्म देखकर लगा कि बॉलीवुड में भी एक रजनीकांत का जन्म हो गया है, यानी सलमान खान, जिन्हें दर्शक किसी भी रूप में पसंद करते हैं और उनके लिए तालियां और सीटियां बजाते हैं, पर यह कहना जरूरी है कि फिल्म सिर्फ और सिर्फ सलमान खान की है। कहानी में कोई नयापन नहीं है। गाने अच्छे हैं, लेकिन कहानी के साथ पिरोए नहीं गए।

हालांकि जितने अच्छे डायलॉग 'दबंग' के थे, उतने 'दबंग-2' के नहीं हैं। हां, चुलबुल पांडे के किरदार को थोड़ा और तराशा गया है। चुलबुल और उनके पिता बने विनोद के साथ कुछ अच्छे सीन्स और खूबसूरत लम्हे दिखाए गए हैं। यहां तक कि उनके भाई मक्खी के साथ भी उनके कुछ भावनात्मक सीन्स हैं, लेकिन मैं 'दबंग-2' में कुछ बेहतर डायलॉग, बेहतर कहानी की उम्मीद कर रहा था, जो मुझे नहीं मिली।

एक्शन सीन्स ने भी मुझे बहुत ज्यादा नहीं लुभाया, लेकिन लोगों को जो भाता है, वह है सिर्फ सलमान खान। बतौर डायरेक्टर अरबाज खान का काम ठीक है। सोनाक्षी के पास करने को कुछ ज्यादा नहीं है, लेकिन जितना है, वह ठीक कहा जा सकता है। कुल मिलाकर ’फुल ऑन’ सलमान की फिल्म है, 'दबंग-2'। सलमान के फैन्स को एंटरटेनमेंट का डोज जरूर मिलेगा, मगर फिल्म के लिए हमारी रेटिंग है, 2.5 स्टार्स।

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