नई दिल्ली:
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
- रेलवे ने राष्ट्रीय फैशन डिजाइन संस्थान (निफ्ट) को कम ऊन वाले हल्के कंबल बनाने का काम सौंपा है. पतले, सामान्य पानी से धुलने लायक कंबलों का परीक्षण भी मध्य रेलवे जोन में पायलट परियोजना के तौर पर किया जा रहा है.
- रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य ट्रेनों में हर यात्रा के दौरान साफ लिनन के साथ धुले हुए कंबल मुहैया कराना है.’’
- फिलहाल लिनन के 3.90 लाख सेट रोजाना मुहैया कराए जाते हैं. इनमें दो चादर, एक तौलिया, तकिया और कंबल शामिल है, जो वातानुकूलित डिब्बों में हर यात्री को दिए जाते हैं.
- कंबलों को अधिक धोने और मौजूदा कंबलों को चरणबद्ध तरीके से नए हल्के एवं मुलायम कपड़े से बने कंबलों से बदलने की योजना बनाई गई है. अधिकारी ने बताया कि कुछ खंडों में कंबलों के कवर बदलने का काम शुरू कर दिया गया है और कंबलों को अब एक माह की जगह 15 दिन और एक सप्ताह में धोने का काम शुरू किया जा रहा है.
- एक दिन पहले ही खबर आई थी कि कैग की फटकार के बाद संभवत: ट्रेनों के एसी कोच में कंबल देने की व्यवस्था ही खत्म कर दी जाएगी. कहा जा रहा था कि कोच के तापमान को थोड़ा बढ़ाकर रेलवे कंबल देने की व्यवस्था समाप्त करने का मन बना रही है.
VIDEO: सीएजी की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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